भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) 10 और 20 रुपये के पॉलीमर (प्लास्टिक) नोटों के पायलट प्रोजेक्ट पर काम कर रहा है। इसके लिए RBI की नोट छापने वाली कंपनी भारतीय रिजर्व बैंक नोट मुद्रण प्राइवेट लिमिटेड (BRBNMPL) ने ट्रायल से जुड़े टेंडर जारी किए हैं। यदि यह परियोजना सफल रहती है, तो भविष्य में छोटे मूल्यवर्ग के नोट नए रूप में दिखाई दे सकते हैं।
मौजूदा नोट छापने में कितना खर्च आता है?
मौजूदा 10 और 20 रुपये के नोट कागज के नहीं, बल्कि 100 प्रतिशत कॉटन आधारित विशेष सामग्री से बनाए जाते हैं। उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार, 10 रुपये का एक नोट छापने की लागत लगभग 70 पैसे से 1.01 रुपये तक और 20 रुपये के नोट की लागत लगभग 95 पैसे से 1 रुपये प्रति नोट के बीच होती है।
प्लास्टिक नोट होंगे महंगे
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पॉलीमर नोटों की शुरुआती छपाई लागत सामान्य नोटों की तुलना में अधिक हो सकती है। अनुमान है कि एक प्लास्टिक नोट तैयार करने में लगभग 2 से 6 रुपये तक का खर्च आ सकता है। हालांकि वास्तविक लागत उत्पादन के स्तर, तकनीक और खरीद प्रक्रिया के अनुसार बदल सकती है।
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फिर क्यों लाए जा रहे हैं ये नोट?
विशेषज्ञों का मानना है कि पॉलीमर नोटों की शुरुआती लागत अधिक होने के बावजूद उनकी उम्र सामान्य नोटों से काफी ज्यादा होती है। ये नोट पानी, धूल और नमी से कम प्रभावित होते हैं तथा जल्दी फटते नहीं हैं। यही वजह है कि लंबे समय में इन्हें अधिक टिकाऊ और किफायती विकल्प माना जाता है।
छोटे नोटों को मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा
10 और 20 रुपये के नोट सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाले मूल्यवर्ग में शामिल हैं। लगातार उपयोग के कारण ये जल्दी खराब हो जाते हैं और इन्हें बार-बार बदलना पड़ता है। पॉलीमर नोट अधिक समय तक चल सकते हैं, जिससे नए नोट छापने की आवश्यकता कम हो सकती है।
अभी ट्रायल चरण में है योजना
फिलहाल पॉलीमर नोटों को लेकर कोई अंतिम निर्णय घोषित नहीं किया गया है। RBI अभी पायलट प्रोजेक्ट और परीक्षण प्रक्रिया पर काम कर रहा है। ट्रायल के नतीजों के आधार पर ही यह तय किया जाएगा कि भविष्य में इन नोटों को बड़े पैमाने पर जारी किया जाएगा या नहीं।