RBI Repo Rate Update: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने अपनी ताजा बैठक में रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर यथावत रखने का निर्णय लिया है। RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में सभी सदस्यों ने एकमत से इस फैसले का समर्थन किया। साथ ही केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को 6.9 प्रतिशत से घटाकर 6.6 प्रतिशत कर दिया है।
वैश्विक चुनौतियों के बीच GDP ग्रोथ अनुमान में कटौती
RBI का मानना है कि मौजूदा वैश्विक परिस्थितियां आर्थिक गतिविधियों पर असर डाल सकती हैं। इसी वजह से विकास दर के अनुमान में संशोधन किया गया है। केंद्रीय बैंक ने कई बाहरी और घरेलू जोखिमों को इसके पीछे प्रमुख कारण बताया है।
पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ने से बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने वैश्विक सप्लाई चेन पर दबाव बढ़ा दिया है। यदि स्थिति और गंभीर होती है तो अंतरराष्ट्रीय व्यापार तथा वस्तुओं की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिसका असर आर्थिक विकास पर भी पड़ सकता है।
महंगी ऊर्जा से विकास की रफ्तार पर असर की आशंका
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और अन्य जरूरी संसाधनों की कीमतों में बढ़ोतरी भी RBI की चिंता का विषय बनी हुई है। ऊर्जा लागत बढ़ने से उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है, जिससे आर्थिक गतिविधियों की गति धीमी होने की संभावना रहती है।
मौसम और कृषि क्षेत्र से जुड़े जोखिम भी अहम
देश में मानसून की स्थिति और कृषि उत्पादन को लेकर बनी अनिश्चितताओं को भी RBI ने ध्यान में रखा है। कृषि क्षेत्र में किसी भी प्रकार की कमजोरी का असर ग्रामीण मांग और समग्र आर्थिक विकास पर पड़ सकता है।
जनवरी 2025 से अब तक 125 बेसिस प्वाइंट घट चुका है रेपो रेट
जनवरी 2025 से जून 2026 के बीच RBI ने रेपो रेट में कुल 125 बेसिस प्वाइंट यानी 1.25 प्रतिशत की कटौती की है। इस दौरान रेपो रेट 6.50 प्रतिशत से घटकर 5.25 प्रतिशत तक पहुंच गया। फरवरी 2025 में पहली बार 0.25 प्रतिशत की कटौती की गई थी। इसके बाद अप्रैल 2025 में भी 0.25 प्रतिशत की कमी की गई। जून 2025 में केंद्रीय बैंक ने 0.50 प्रतिशत की बड़ी कटौती की, जबकि दिसंबर 2025 में एक बार फिर 0.25 प्रतिशत की राहत दी गई। वहीं फरवरी 2026 की बैठक में दरों में कोई बदलाव नहीं किया गया था।
रेपो रेट में कटौती का लोन धारकों को मिला फायदा
पिछले वर्ष की शुरुआत में रेपो रेट 6.50 प्रतिशत थी, जो अब घटकर 5.25 प्रतिशत पर आ चुकी है। इसका सबसे अधिक लाभ फ्लोटिंग ब्याज दर वाले होम लोन ग्राहकों को मिला है। ब्याज दरों में कमी आने से उनकी मासिक EMI पहले की तुलना में काफी कम हुई है।
FD निवेशकों की कमाई पर पड़ा असर
जब रेपो रेट ऊंचे स्तर पर थी, तब बैंक फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर आकर्षक ब्याज दरें दे रहे थे। हालांकि लगातार हुई कटौतियों के बाद कई बैंकों ने FD की ब्याज दरों में कमी की है, जिससे निवेशकों के रिटर्न पर असर पड़ा है।
रेपो रेट स्थिर रहने से EMI में नहीं होगी बढ़ोतरी
RBI के इस फैसले के बाद होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों को राहत मिलेगी। रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होने से मौजूदा लोन की EMI बढ़ने की संभावना नहीं है और उधारकर्ताओं पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ नहीं पड़ेगा।
नए लोन लेने वालों को भी मिलेगा फायदा
जो लोग नया घर खरीदने, वाहन लेने या किसी अन्य जरूरत के लिए लोन लेने की योजना बना रहे हैं, उन्हें भी वर्तमान कम ब्याज दरों का लाभ मिलता रहेगा। बैंकों की लेंडिंग दरों में फिलहाल किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है।
FD निवेशकों के लिए भी राहत भरी खबर
रेपो रेट को स्थिर रखने का फायदा FD निवेशकों को भी मिल सकता है। ब्याज दरों में तत्काल कटौती की संभावना कम होने से वरिष्ठ नागरिकों और आम निवेशकों को मौजूदा दरों पर बेहतर रिटर्न मिलता रह सकता है।
रियल एस्टेट और ऑटो सेक्टर को मिल सकती है मजबूती
स्थिर ब्याज दरें बाजार में मांग को समर्थन देती हैं। EMI बढ़ने का जोखिम नहीं रहने से घरों और वाहनों की खरीदारी को प्रोत्साहन मिल सकता है। इससे रियल एस्टेट और ऑटोमोबाइल सेक्टर की गतिविधियों को गति मिलने की उम्मीद है।
आर्थिक विकास और महंगाई के बीच संतुलन बनाने की कोशिश
रेपो रेट को यथावत रखकर RBI एक तरफ देश की आर्थिक वृद्धि को सहारा देना चाहता है, वहीं दूसरी ओर पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ती कच्चे तेल की कीमतों और संभावित महंगाई के दबाव पर भी नजर बनाए हुए है। केंद्रीय बैंक का यह कदम विकास और मूल्य स्थिरता के बीच संतुलन कायम रखने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।