आरबीआई की रिपोर्ट में बैंकिंग धोखाधड़ी का बड़ा खुलासा हुआ है, प्राइवेट बैंकों में सबसे ज्यादा धोखाधड़ी के मामले कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग के जरिए हुए हैं। वहीं सरकार बैंकों में सबसे ज्यादा धोखाधड़ी के मामले में लोन सेक्शन में हुए हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ताजा रिपोर्ट में एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में बैंकिंग धोखाधड़ी से जुड़ी राशि तीन गुना बढ़कर 36,014 करोड़ रुपये हो गई है, जो पिछले वित्त वर्ष 2023-24 में सिर्फ 12,230 करोड़ रुपये थी। हालांकि धोखाधड़ी के मामलों की संख्या घटकर 23,953 रह गई, जो पिछले साल 36,060 थी।
डिजिटल लेनदेन बना सबसे बड़ा जरिया
धोखाधड़ी की सबसे ज्यादा घटनाएं डिजिटल भुगतान के जरिए हुई हैं, खासतौर पर कार्ड और इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से। कुल धोखाधड़ी के मामलों में से 56.5 प्रतिशत यानि 13,516 मामले इसी श्रेणी के अंतर्गत आते हैं। निजी क्षेत्र के बैंकों में इन मामलों की संख्या सबसे अधिक रही है। आरबीआई ने एक रिपोर्ट में कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में धोखाधड़ी वाली राशि बढ़कर 36,014 करोड़ रुपये हो गई, जो वित्त वर्ष 2023-24 में लगभग 12,230 करोड़ रुपये थी. हालांकि, धोखाधड़ी के मामलों की संख्या पिछले वित्त वर्ष में घटकर 23,953 रह गई, जो 2023-24 में 36,060 थी.
सरकारी बैंकों में बड़ा नुकसान
रिपोर्ट में बताया गया है कि निजी क्षेत्र के बैंकों में धोखाधड़ी के मामलों की संख्या सबसे ज्यादा है, जिसमें 60 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है। वहीं, अगर पैसे के लिहाज से देखा जाए। तो इन बैंकों का हिस्सा 71 प्रतिशत से अधिक है। दूसरी ओर, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को सबसे ज्यादा आर्थिक नुकसान हुआ है। यहां लोन धोखाधड़ी के मामले अधिक हैं, जो कुल फ्रॉड राशि का 92 प्रतिशत से अधिक हिस्सा रखते हैं।
लोन फ्रॉड बना बड़ा सिरदर्द
RBI के अनुसार, धोखाधड़ी की रकम में भारी बढ़ोतरी का एक मुख्य कारण 122 पुराने मामलों का फिर से वर्गीकरण करना है। ये वे मामले हैं जिन्हें पहले धोखाधड़ी नहीं माना गया था, लेकिन सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के बाद दोबारा जांच कर उन्हें फ्रॉड की श्रेणी में रखा गया।