महिला प्रीमियर लीग 2026 का फाइनल भी वही कहानी लेकर आया, जिसे RCB के फैंस दो साल पहले देख चुके थे। एक बार फिर सामने दिल्ली कैपिटल्स थी और एक बार फिर जीत रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के नाम रही। स्मृति मंधाना की कप्तानी वाली RCB ने रोमांच से भरे फाइनल में दिल्ली को 6 विकेट से हराकर दूसरी बार WPL का खिताब जीत लिया। खास बात यह रही कि WPL के चार साल के इतिहास में दिल्ली तीसरी बार फाइनल में पहुंची, लेकिन ट्रॉफी फिर भी उससे दूर रह गई।
फाइनल में बना रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड
वडोदरा में खेले गए इस मुकाबले में दिल्ली कैपिटल्स ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 203 रन बनाए, जो WPL फाइनल का अब तक का सबसे बड़ा स्कोर है। दबाव पूरी तरह बेंगलुरु पर था, क्योंकि लक्ष्य बड़ा था और मुकाबला फाइनल का। लेकिन RCB ने न सिर्फ यह स्कोर हासिल किया, बल्कि WPL इतिहास का सबसे बड़ा रन चेज भी सफलतापूर्वक पूरा कर दिया। इससे पहले भी सबसे बड़ा रन चेज RCB के ही नाम था और इस बार टीम ने उसी रिकॉर्ड को और मजबूत कर दिया।
मंधाना की कप्तानी पारी बनी फर्क
इस ऐतिहासिक जीत की सबसे बड़ी वजह बनीं कप्तान स्मृति मंधाना। उन्होंने 41 गेंदों में 87 रन की विस्फोटक पारी खेली और दिल्ली की गेंदबाजी की कमर तोड़ दी। बड़े मैच में बड़े खिलाड़ी वाली कहावत को मंधाना ने पूरी तरह सही साबित किया। उनकी पारी ने न सिर्फ रन चेज को आसान बनाया, बल्कि टीम को मानसिक बढ़त भी दिलाई। 19.4 ओवर में लक्ष्य हासिल करते हुए RCB ने यह दिखा दिया कि दबाव में खेलने में अब वह माहिर हो चुकी है।
एक साथ WPL और IPL की चैंपियन
इस जीत के साथ रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु ने ऐसा कारनामा कर दिखाया, जो भारत में टी20 लीग के इतिहास में पहले कभी नहीं हुआ। RCB अब एकमात्र ऐसी फ्रेंचाइजी बन गई है, जिसके पास एक ही समय में WPL और IPL दोनों की ट्रॉफी है। 2025 में रजत पाटीदार की कप्तानी में मेंस टीम ने IPL जीता था और अब विमेंस टीम ने WPL 2026 पर कब्जा कर लिया। यानी अगले IPL चैंपियन के तय होने से पहले दोनों बड़ी टी20 लीग की चैंपियन RCB ही है।
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तीन साल में तीन ट्रॉफी का दबदबा
RCB की यह जीत सिर्फ एक खिताब नहीं, बल्कि बदली हुई किस्मत की कहानी है। 2008 से लेकर 2023 तक फ्रेंचाइजी को ट्रॉफी का इंतजार करना पड़ा था। लेकिन 2024 में पहला WPL, 2025 में पहला IPL और अब 2026 में दूसरा WPL खिताब जीतकर RCB ने तीन साल में तीन ट्रॉफी अपने नाम कर ली हैं। यह दौर साफ दिखाता है कि टीम अब सिर्फ नाम की नहीं, बल्कि ट्रॉफी जीतने वाली फ्रेंचाइजी बन चुकी है।
दिल्ली के लिए फिर अधूरा सपना
वहीं दिल्ली कैपिटल्स के लिए यह हार फिर एक दर्दनाक अध्याय बन गई। शानदार स्कोर बनाने के बावजूद टीम खिताब नहीं बचा सकी। लगातार फाइनल में पहुंचना ताकत जरूर दिखाता है, लेकिन ट्रॉफी न जीत पाना सवाल भी खड़े करता है। दूसरी तरफ RCB ने साबित कर दिया कि बड़े मैचों में वही टीम जीतती है, जो मौके को पकड़ना जानती है।