रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु के लिए आईपीएल 2026 का सीजन ऐतिहासिक रहा। टीम ने पहली बार खिताब जीतकर करोड़ों फैंस का सपना पूरा किया। लेकिन इस खुशी के बीच एक ऐसी खबर भी आई जिसने खिलाड़ियों और समर्थकों को भावुक कर दिया। टीम के स्ट्रेंथ और कंडीशनिंग कोच बसु शंकर ने अपने लंबे करियर को विराम देने का ऐलान कर दिया है। खिताबी जीत के तुरंत बाद उनके इस फैसले ने क्रिकेट जगत का ध्यान खींच लिया।
कौन हैं बसु शंकर?
बसु शंकर भारतीय खेल जगत के सबसे सम्मानित फिटनेस विशेषज्ञों में गिने जाते हैं। उनका जन्म 3 अगस्त 1968 को हुआ था और वे राष्ट्रीय स्तर के स्प्रिंटर भी रह चुके हैं। उन्होंने अपने कोचिंग करियर की शुरुआत तमिलनाडु क्रिकेट संघ के साथ की थी। इसके बाद वे राष्ट्रीय क्रिकेट अकादमी में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। साल 2009 में उन्होंने आरसीबी का साथ पकड़ा और तब से टीम के फिटनेस ढांचे का अहम हिस्सा बने रहे।
कई बड़े खिलाड़ियों को किया तैयार
बसु शंकर ने सिर्फ क्रिकेटरों ही नहीं बल्कि कई बड़े खिलाड़ियों के साथ काम किया। विराट कोहली, दिनेश कार्तिक, आर अश्विन और दीपिका पल्लीकल जैसे नाम उनकी ट्रेनिंग का हिस्सा रहे हैं। फिटनेस के क्षेत्र में उनकी सोच और मेहनत ने कई खिलाड़ियों के करियर को नई दिशा दी। यही वजह है कि उन्हें भारतीय खेल जगत के सबसे प्रभावशाली फिटनेस कोचों में गिना जाता है।
विराट की फिटनेस में निभाई बड़ी भूमिका
विराट कोहली की फिटनेस आज दुनिया भर में मिसाल मानी जाती है। लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उनकी फिटनेस को लेकर सवाल उठते थे। साल 2015 के आसपास बसु शंकर ने विराट के साथ गहराई से काम करना शुरू किया। उन्होंने विराट को ट्रेनिंग, रिकवरी और शरीर को बेहतर तरीके से संभालने के तरीके सिखाए। इसके बाद विराट की फिटनेस में जबरदस्त बदलाव देखने को मिला और वह मैदान पर पहले से ज्यादा मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरे।
विराट ने कई बार किया जिक्र
विराट कोहली कई मौकों पर सार्वजनिक रूप से कह चुके हैं कि उनकी फिटनेस यात्रा में बसु शंकर का बड़ा योगदान है। उन्होंने माना था कि बसु शंकर ने उनके सोचने और ट्रेनिंग करने का तरीका बदल दिया। यही कारण है कि विराट उन्हें सिर्फ कोच नहीं बल्कि अपना मार्गदर्शक भी मानते हैं। दोनों के बीच का यह रिश्ता वर्षों से चर्चा का विषय रहा है।
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एक युग का हुआ अंत
बसु शंकर के संन्यास के साथ भारतीय क्रिकेट के फिटनेस सफर का एक महत्वपूर्ण अध्याय भी समाप्त हो रहा है। उन्होंने खिलाड़ियों को सिर्फ मजबूत शरीर ही नहीं दिया, बल्कि पेशेवर फिटनेस की नई सोच भी दी। आरसीबी की खिताबी जीत के साथ उनका विदाई लेना इस सफर को और भी खास बना देता है। आने वाले समय में उनकी विरासत भारतीय क्रिकेट की फिटनेस संस्कृति में हमेशा दिखाई देती रहेगी।