
हिंदू धर्म में भगवान शिव को संहार के देवता के रूप में जाना जाता है, लेकिन वे उतने ही सरल और भक्तों पर कृपा बरसाने वाले हैं। उन्हें प्रसन्न करना अन्य देवताओं की तुलना में सरल माना जाता है। खासकर सोमवार का दिन भोलेनाथ को समर्पित होता है और इस दिन उनका पूजन, व्रत तथा मंत्र जाप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। यदि आप शिव की विशेष कृपा चाहते हैं, तो हर सोमवार रावण रचित शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत लाभकारी होता है।
रावण और शिव तांडव स्तोत्र का संबंध
लंकेश्वर रावण, शिव का परम भक्त था। उसने अपनी तपस्या से भगवान शिव को प्रसन्न किया और उन्हें प्रसन्न करने के लिए एक अद्भुत स्तोत्र की रचना की, जिसे आज हम शिव तांडव स्तोत्र के नाम से जानते हैं। यह स्तोत्र न केवल शिव की महिमा का गान करता है, बल्कि उसकी उच्च साहित्यिक शैली और लयबद्धता इसे बेहद प्रभावशाली बनाती है।
शिव तांडव स्तोत्र का पाठ क्यों करें?
शिव तांडव स्तोत्र का नियमित पाठ करने से:
मानसिक शांति प्राप्त होती है।
नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
रोग, बाधा और कर्ज जैसी समस्याओं से छुटकारा मिलता है।
व्यक्ति के आत्मबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है।
घर में सकारात्मक ऊर्जा और सुख-शांति का वास होता है।
सोमवार को पाठ की विधि:
प्रातःकाल स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
घर के मंदिर में दीप जलाकर भगवान शिव का पूजन करें।
बिल्वपत्र, दूध, जल, धतूरा आदि अर्पित करें।
बैठकर शांत मन से शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करें।
पाठ के पश्चात "ॐ नमः शिवाय" का जाप करें