Ekadashi 2025: गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र का पाठ हिंदू धर्म में अत्यंत पुण्यदायक और आध्यात्मिक लाभ देने वाला माना जाता है.यह स्तोत्र श्रीमद्भागवत महापुराण के आठवें स्कंध में वर्णित है, जिसमें हाथीराज गजेंद्र द्वारा भगवान विष्णु से की गई प्रार्थना का वर्णन है। इसे "मोक्ष स्तोत्र" इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके माध्यम से गजेंद्र को संकट से मुक्ति और मोक्ष की प्राप्ति हुई थी। आपको बता दें कि अब गुरुवार को एकादशी पड़ रही है. जिसकी हिन्दू धर्म में बहुत मान्यता है. इस दिन भक्तगण सुबह से व्रत रखते हैं. साथ ही भगवान विष्णू को प्रश्न करने के लिए उनकी आराधना करते हैं. हाल ही में निर्जला एकादशी भी गई है..
अत्यंत फलदायी है मंत्र
विशेष रूप से गुरुवार और एकादशी के दिन इस स्तोत्र का पाठ अत्यंत फलदायी माना जाता है। गुरुवार भगवान विष्णु को समर्पित दिन होता है, वहीं एकादशी व्रत विष्णु भक्ति का विशेष पर्व है। इन दोनों दिनों में श्रद्धा से गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र का पाठ करने से जीवन की कठिनाइयों से मुक्ति मिलती है, मानसिक शांति प्राप्त होती है और आध्यात्मिक उन्नति होती है।
विषम परिस्थियों में लाभ देता है गजेन्द्र मोक्ष स्त्रोत
गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र व्यक्ति को विषम परिस्थितियों में धैर्य, विश्वास और ईश्वर भक्ति की प्रेरणा देता है। यह स्तोत्र यह भी सिखाता है कि जब जीवन में संकट आए, तो प्रभु की शरण में जाना ही सर्वोत्तम उपाय है। श्रद्धालु मानते हैं कि इस स्तोत्र के नियमित पाठ से पापों का नाश होता है, ग्रह बाधाएं शांत होती हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय है। इसलिए हर गुरुवार और एकादशी के दिन इसका पाठ विशेष रूप से किया जाना चाहिए, जिससे भक्त को कृपा, सुरक्षा और आंतरिक शांति प्राप्त हो सके।