कार्तिक पूर्णिमा हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और शुभ तिथि मानी जाती है। इस दिन भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है। मान्यता है कि कार्तिक पूर्णिमा के दिन किया गया श्री सूक्त पाठ न केवल मां लक्ष्मी को प्रसन्न करता है बल्कि जीवन से दरिद्रता और आर्थिक संकट को भी दूर करता है।
श्री सूक्त का महत्व
ऋग्वेद में वर्णित ‘श्री सूक्त’ माता लक्ष्मी को समर्पित एक अद्भुत स्तोत्र है। इसमें देवी लक्ष्मी के स्वरूप, उनके गुणों और कृपा की महिमा का वर्णन मिलता है। यह पाठ धन, समृद्धि, सौभाग्य और शांति का प्रतीक माना गया है। जब इसे श्रद्धा और नियमपूर्वक पढ़ा जाता है, तो घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और आर्थिक प्रगति के मार्ग खुलते हैं।
कार्तिक पूर्णिमा पर क्यों करें श्री सूक्त पाठ
कार्तिक मास की पूर्णिमा का दिन देवताओं का अत्यंत प्रिय दिन माना जाता है। इस दिन चंद्रमा अपनी पूर्ण कलाओं के साथ प्रकट होता है, जिससे वातावरण में विशेष ऊर्जा व्याप्त होती है। इस शुभ संयोग में जब मां लक्ष्मी की पूजा श्री सूक्त के साथ की जाती है, तो साधक को अतुलनीय आध्यात्मिक और भौतिक लाभ प्राप्त होते हैं।
पूजा विधि और पाठ का सही तरीका
कार्तिक पूर्णिमा की संध्या को स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। घर या पूजा स्थान पर मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित करें। घी के दीपक जलाएं, पुष्प, धूप और नैवेद्य अर्पित करें। तत्पश्चात शांत मन से श्री सूक्त का पाठ करें। यदि संभव हो तो पाठ को 11 या 21 बार दोहराएं। पाठ के बाद आरती करें और परिवार के सभी सदस्यों को प्रसाद दें।
फल और लाभ
विश्वास किया जाता है कि श्री सूक्त पाठ करने से जीवन में स्थायी सुख-समृद्धि का आगमन होता है। व्यापार में वृद्धि, धन की स्थिरता और मानसिक शांति की प्राप्ति होती है। जो व्यक्ति नियमित रूप से श्री सूक्त का पाठ करता है, उसके जीवन से गरीबी और नकारात्मकता का अंत हो जाता है।