मध्यप्रदेश से वन्यजीव प्रेमियों और पर्यावरणविदों के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। वर्षों तक विलुप्ति के कगार पर पहुंच चुके गिद्धों की संख्या अब राज्य में तेजी से बढ़ रही है। खासकर कटनी जिला इस दिशा में एक मिसाल बनता जा रहा है, जहां गिद्धों की आबादी में बीते कुछ सालों में लगातार बढ़ोतरी दर्ज की गई है। ताजा ग्रीष्मकालीन सर्वे के अनुसार इस बार जिले में कुल 401 गिद्ध देखे गए हैं। यह आंकड़ा पिछले वर्षों की तुलना में अधिक है, जो दर्शाता है कि वन विभाग और स्थानीय प्रशासन द्वारा संरक्षण के प्रयास रंग ला रहे हैं। गिद्ध न केवल पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलन में रखते हैं, बल्कि मृत जीवों को खाकर जंगल को स्वच्छ भी बनाते हैं। इसलिए इनकी मौजूदगी को 'प्राकृतिक सफाई मित्र' के रूप में भी देखा जाता है।
गिद्धों की संख्या में आई उछाल
कटनी वनमंडल के तीन प्रमुख क्षेत्रों में हुई गिद्ध गणना में कुल 401 गिद्ध दर्ज किए गए हैं। इनमें सबसे ज्यादा विजयराघवगढ़ में 353, कटनी क्षेत्र में 39 और रीठी में 9 गिद्ध मिले हैं। यह आंकड़ा फरवरी की तुलना में 19 अधिक है।
166 घोंसलों की भी हुई पुष्टि
सर्वे में 166 गिद्धों के घोंसले भी चिन्हित किए गए हैं, जिनमें से 147 सिर्फ विजयराघवगढ़ क्षेत्र में मिले हैं। इससे साफ है कि आने वाले समय में गिद्धों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।
तीन प्रमुख प्रजातियों की मौजूदगी
कटनी जिले में मुख्यतः सफेद गिद्ध, लॉन्ग बिल्ड वल्चर और अब देसी बिल्ड वल्चर भी देखे गए हैं। यह जैव विविधता और स्थानीय पारिस्थितिकी के लिए बेहद अहम संकेत हैं।
जंगलों की सफाई में निभा रहे अहम भूमिका
गिद्ध न सिर्फ मृत जानवरों को खाकर संक्रमण फैलने से रोकते हैं, बल्कि जंगल को साफ रखने में भी मदद करते हैं। इसीलिए इन्हें पर्यावरण का 'स्वच्छता दूत' कहा जाता है।
पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को मिला समर्थन
गिद्धों की बढ़ती संख्या राज्य और जिला प्रशासन की सफल नीतियों का परिणाम मानी जा रही है। इससे जंगलों का संतुलन भी बेहतर होगा और अन्य वन्यजीवों की आबादी को भी सकारात्मक असर मिलेगा।