
महेश केजरीवाल
देश के पहले बेंगलुरु स्थित येलहंका के Rail Wheel Factory में खराब हुए व्हील का रिसाइकिलिंग कर दो मिनट में एक पहिए का निर्माण किया जाता है. वर्तमान में एक साल में करीब एक लाख 90 हजार मालगाड़ी पहिए का निर्माण किया जाता है। इसके अलावा यहां साल में एक लाख 12 हजार एक्सेल और एक लाख 12 हजार 500 पहिया सेट का निर्माण हो रहा है. बेंगलुरु के रेल व्हील फैक्टरी में एकीकृत और अत्याधुनिक उत्पादन संयंत्र फैक्टरी की स्थापना 1984 में हुई थी. यहां यह भारतीय रेलवे के पहिये, एक्सल तथा व्हीलसेट्स का एक प्रमुख निर्माण केंद्र है.
पहिया फैक्टरी में सभी तीन घटक कैस्ट व्हील, फोर्ज्ड एक्सल और व्हीलसेट—एक ही छत के नीचे बनते है। पिछले वित्त वर्ष (2023–24) में फैक्टरी ने रिकॉर्ड 1,96,265 व्हील, 83,054 एक्सल, और 94,275 व्हीलसेट्स का उत्पादन किया । कई विशेषताओं के कारण रेल पहिया फैक्टरी को Golden Peacock Award (Environment Preservation, 2021) और BWSSB से Jalarushi Award (2020) से सम्मानित किया जा चुका है.
'Zero Discharge Campus' बन चुकी रेल पहिया फैक्टरी ने वर्षा जल संचयन, खोले गए कुओं का पुनरुद्धार, वेटलैंड मरम्मत और सेप्टिक ट्रीटमेंट जैसे उपाय अपनाए हैं, जिससे BWSSB से मिलने वाले पानी पर निर्भरता में उल्लेखनीय कमी आई है। बीते वर्षों में फैक्टरी ने पानी के बिल में लगभग ₹20.65 लाख प्रति वर्ष की बचत की है. हाल ही में एक नई एक्सल फोर्जिंग लाइन और मशीनिंग लाइन की शुरुआत की गई है, जिससे उत्पादन क्षमता में भारी वृद्धि हुई है — अब फोर्जिंग क्षमता 1.6 लाख एक्सल प्रति वर्ष तक बढ़ गई है।