सोशल मीडिया पर इन दिनों “रील्स देखो और पैसे कमाओ” जैसे विज्ञापन तेजी से वायरल हो रहे हैं। घर बैठे कमाई का दावा करने वाले ये ऑफर लाखों लोगों को आकर्षित कर रहे हैं। हालांकि साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे कई ऑफर वास्तव में ठगी का नया तरीका हैं। साइबर अपराधी लोगों की जल्दी पैसा कमाने की इच्छा का फायदा उठाकर उन्हें अपने जाल में फंसाते हैं और फिर उनकी निजी जानकारी तथा बैंक खाते तक पहुंच बना लेते हैं।
ऐप डाउनलोड करते ही शुरू होता है खेल
इस तरह के स्कैम में सबसे पहले लोगों को किसी लिंक या मैसेज के जरिए एक ऐप डाउनलोड करने के लिए कहा जाता है। दावा किया जाता है कि वीडियो या रील्स देखकर आसानी से कमाई की जा सकती है। ऐप इंस्टॉल होने के बाद यह फोन में कई तरह की परमिशन मांगता है, जिनमें एसएमएस पढ़ने, कॉन्टैक्ट्स एक्सेस करने और स्क्रीन गतिविधि देखने जैसी संवेदनशील अनुमतियां शामिल होती हैं। कई लोग बिना जांच-पड़ताल किए इन्हें अनुमति दे देते हैं और यहीं से खतरा शुरू हो जाता है।
फर्जी विड्रॉल बटन से चुराई जाती है जानकारी
कुछ समय तक ऐप यूजर को यह विश्वास दिलाता है कि वह पैसे कमा रहा है। जब व्यक्ति कमाई गई राशि निकालने की कोशिश करता है तो उसे एक फर्जी विड्रॉल विकल्प दिखाई देता है। इस पर क्लिक करते ही फोन में एक खतरनाक APK फाइल डाउनलोड हो सकती है। यह फाइल मोबाइल में मौजूद बैंकिंग जानकारी, पासवर्ड और ओटीपी तक साइबर अपराधियों की पहुंच बना देती है। इसके बाद कुछ ही मिनटों में बैंक खाते से रकम गायब हो सकती है।
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ऐसे रखें खुद को सुरक्षित
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि इंटरनेट पर दिखने वाले आसान कमाई के दावों पर आंख बंद करके भरोसा नहीं करना चाहिए। किसी भी अनजान वेबसाइट या लिंक से ऐप डाउनलोड करने से बचें और केवल आधिकारिक प्लेटफॉर्म से ही एप्लिकेशन इंस्टॉल करें। इसके अलावा किसी ऐप को एसएमएस, कॉन्टैक्ट्स या स्क्रीन एक्सेस जैसी गैरजरूरी परमिशन देने से पहले सावधानी बरतें। छोटी सी गलती बड़ी आर्थिक हानि का कारण बन सकती है।
ठगी का शिकार होने पर तुरंत करें शिकायत
यदि किसी व्यक्ति के साथ साइबर धोखाधड़ी हो जाती है तो समय गंवाना नुकसान बढ़ा सकता है। ऐसे मामलों में तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध पोर्टल पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर संपर्क करना चाहिए। समय पर कार्रवाई कई बार ठगी गई रकम को बचाने में मददगार साबित हो सकती है। साइबर अपराधियों के बदलते तरीकों को देखते हुए डिजिटल सतर्कता ही सबसे बड़ा बचाव है।