संसद का बजट सत्र शुरू होते ही राजनीतिक और आर्थिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। राष्ट्रपति के संयुक्त संबोधन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकार की नीतियों और आगामी बजट की दिशा को लेकर अहम संकेत दिए। उन्होंने सुधारों की रफ्तार, भविष्य की योजनाओं और वैश्विक साझेदारियों का उल्लेख करते हुए देश को अगले 25 वर्षों के विकास पथ पर अग्रसर बताया।
राष्ट्रपति के संबोधन से शुरू हुआ अहम सत्र
बजट सत्र की शुरुआत राष्ट्रपति के दोनों सदनों के संयुक्त संबोधन से हुई, जिसमें आगामी विधायी प्राथमिकताओं और राष्ट्रीय लक्ष्यों की रूपरेखा सामने रखी गई। इसके तुरंत बाद प्रधानमंत्री ने संसद परिसर में मीडिया से बात करते हुए कहा कि सांसदों से की गई अपेक्षाएं देश के भविष्य के लिए निर्णायक होंगी। उन्होंने इसे 21वीं सदी के दूसरे चरण की शुरुआत बताते हुए ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य की ओर कदम बढ़ाने वाला सत्र करार दिया।
‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ की नीति पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार की पहचान हमेशा सुधार, प्रदर्शन और परिवर्तन रही है और अब देश “रिफॉर्म एक्सप्रेस” पर आगे बढ़ चुका है। उन्होंने बताया कि लंबे समय से लंबित समस्याओं से निकलकर अब दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस फैसले लिए जा रहे हैं। उनका कहना था कि सभी नीतियां नागरिक-केंद्रित हैं और विकास को टिकाऊ बनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
भारत-EU समझौते से बढ़ा भरोसा
प्रधानमंत्री ने भारत और यूरोपीय संघ के बीच हुए फ्री ट्रेड समझौते का उल्लेख करते हुए इसे साल की सकारात्मक शुरुआत बताया। उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि वे इस मौके का लाभ उठाते हुए गुणवत्ता को प्राथमिकता दें। उनके अनुसार, 27 देशों के बड़े बाजार में टिके रहने के लिए उत्पादों की श्रेष्ठता जरूरी है, जिससे भारतीय मैन्युफैक्चरिंग को दीर्घकालिक फायदा होगा।
आर्थिक सर्वे और बजट पर सबकी नजर
वित्त मंत्री द्वारा लोकसभा में पेश किया जाने वाला आर्थिक सर्वे देश की अर्थव्यवस्था की मौजूदा स्थिति और संभावनाओं का आकलन करेगा। इसके बाद 1 फरवरी को केंद्रीय बजट पेश किया जाएगा, जो उनका लगातार नौवां बजट होगा। वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच आर्थिक वृद्धि, निवेश और रोजगार को बढ़ावा देने वाले कदमों की इसमें उम्मीद की जा रही है।
विपक्ष की मांगें और सरकार का रुख
सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने कुछ विधेयकों और प्रक्रियाओं पर चर्चा की मांग उठाई है। सरकार की ओर से स्पष्ट किया गया कि इन विषयों पर पहले ही बहस हो चुकी है और मौजूदा सत्र में प्राथमिकता बजट और आर्थिक मुद्दों को दी जाएगी। आने वाले दिनों में संसद में गहन बहस और नीतिगत फैसलों पर सबकी नजर रहेगी।