रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड के लिए 2025 का साल निवेशकों के लिहाज से काफी दमदार रहा है। कंपनी की मार्केट वैल्यू में करीब 4.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का इजाफा हुआ और शेयर ने लगभग 27 प्रतिशत की छलांग लगाई। इस तेजी ने बाजार में यह भरोसा मजबूत किया है कि रिलायंस अब बड़े निवेश के दौर से निकलकर स्थिर कमाई वाले फेज में प्रवेश कर चुकी है। टेलीकॉम रिटेल और रिफाइनिंग जैसे अलग अलग बिजनेस से लगातार आ रहे मजबूत नतीजों ने कंपनी को एक बार फिर निवेशकों की पसंद बना दिया है।
जियो IPO क्यों माना जा रहा गेमचेंजर
अब निवेशकों की निगाहें साल 2026 पर टिकी हैं जब रिलायंस जियो का बहुप्रतीक्षित IPO आने की उम्मीद है। माना जा रहा है कि यह भारत के शेयर बाजार का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है। अगर ऐसा होता है तो यह रिलायंस के इतिहास में पिछले 10 सालों का सबसे बड़ा दांव होगा। बाजार जानना चाहता है कि इस IPO से रिलायंस ग्रुप की वैल्यू में कितनी बढ़ोतरी होगी और इसका फायदा सीधे RIL के शेयरधारकों तक कैसे पहुंचेगा। विश्लेषकों के मुताबिक जियो की लिस्टिंग से डिजिटल बिजनेस की छिपी हुई वैल्यू सामने आएगी।
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मजबूत मुनाफा और कैश फ्लो की ताकत
रिलायंस का तिमाही मुनाफा लगातार 18 हजार से 20 हजार करोड़ रुपये के आसपास बना हुआ है। इसकी बड़ी वजह रिफाइनिंग बिजनेस में स्थिरता और रिटेल तथा डिजिटल सेवाओं में तेज ग्रोथ है। रघुनाथ कैपिटल के सौरव चौधरी के मुताबिक रिलायंस अगले वित्त वर्ष में मजबूत स्थिति में कदम रख रही है। कंपनी का डाइवर्सिफाइड बिजनेस मॉडल कमाई में उतार चढ़ाव को सीमित करता है। यही वजह है कि निवेशक अब रिलायंस को ज्यादा भरोसेमंद और लंबी अवधि के लिए मजबूत विकल्प मान रहे हैं।
2026 तक बदल जाएगा कमाई का संतुलन
अनुमान है कि 2026 तक टेलीकॉम और रिटेल बिजनेस मिलकर रिलायंस के ऑपरेटिंग कैश फ्लो का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा देंगे। इसका मतलब यह है कि कंपनी की निर्भरता ऑयल टू केमिकल जैसे चक्रीय कारोबार पर कम होती जाएगी। इस बदलाव को ग्लोबल एजेंसियों ने भी सकारात्मक माना है। दिसंबर 2025 में S&P ग्लोबल रेटिंग्स ने रिलायंस की क्रेडिट रेटिंग को BBB+ से बढ़ाकर A- कर दिया। एजेंसी का कहना है कि अब कंपनी की कमाई ज्यादा अनुमानित और कैश फ्लो पहले से ज्यादा मजबूत हो गया है। यही कारण है कि जियो IPO को लेकर बाजार में उत्साह चरम पर है और निवेशक इसे अगले बड़े मौके के तौर पर देख रहे हैं।