मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ा मोड़ आता दिखाई दे रहा है। अमेरिका की ओर से भारत को फिलहाल रूसी तेल खरीदने की छूट दिए जाने के बाद रिलायंस इंडस्ट्रीज ने फिर से रूस से कच्चा तेल खरीदने की संभावनाओं पर काम शुरू कर दिया है। माना जा रहा है कि अगर हालात ऐसे ही बने रहे तो आने वाले समय में रूसी टैंकरों का रुख दोबारा भारतीय रिफाइनरियों की ओर हो सकता है।
रिलायंस ने शुरू की रणनीतिक तैयारी
ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के अनुसार कंपनी इस रूसी कच्चे तेल को अपने उस रिफाइनरी प्लांट में प्रोसेस करने की योजना बना रही है जो मुख्य रूप से घरेलू भारतीय बाजार के लिए ईंधन तैयार करता है। सूत्रों के मुताबिक कंपनी का एक्सपोर्ट फोकस्ड रिफाइनरी प्लांट फिलहाल गैर-रूसी ग्रेड के कच्चे तेल पर ही काम करता रहेगा, ताकि अंतरराष्ट्रीय बाजार से जुड़े प्रतिबंधों का असर कम किया जा सके।
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अमेरिकी रुख में दिखा बड़ा बदलाव
रूसी तेल खरीदने की यह छूट अमेरिकी प्रशासन के रुख में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है। इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भारत पर रूस से तेल आयात कम करने का दबाव बना चुके थे। इसके बावजूद पिछले साल रूस से तेल खरीदने वाली भारतीय कंपनियों में रिलायंस सबसे आगे रही थी और कंपनी ने लगभग छह लाख बैरल प्रतिदिन रूसी कच्चे तेल का आयात किया था।
इस साल मिडिल ईस्ट पर बढ़ी निर्भरता
रूसी तेल की खरीद कम होने के बाद वर्ष 2026 में रिलायंस के आयात का बड़ा हिस्सा मिडिल ईस्ट से आ रहा है। शिप ट्रैकिंग डेटा के अनुसार कंपनी के कुल आयात में रूसी तेल की हिस्सेदारी पिछले साल के मुकाबले काफी घट गई है और यह लगभग दसवें हिस्से तक सिमट गई है। इसके पीछे एक बड़ा कारण यूरोपीय यूनियन की ओर से रूसी कच्चे तेल से बने पेट्रोलियम उत्पादों पर लगाया गया प्रतिबंध भी माना जा रहा है।
समुद्र में खड़े टैंकरों में मौजूद बड़ा भंडार
इस बीच ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष के कारण मिडिल ईस्ट में ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव बढ़ गया है, जिससे कच्चे तेल और गैस की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। आंकड़ों के मुताबिक फिलहाल करीब डेढ़ करोड़ बैरल रूसी तेल अरब सागर और बंगाल की खाड़ी में टैंकरों पर मौजूद है, जबकि लगभग 70 लाख बैरल तेल सिंगापुर के पास जहाजों में खड़ा है। ऐसे में जरूरत पड़ने पर भारतीय रिफाइनरियां तेजी से रूसी तेल की खरीद बढ़ा सकती हैं।