Hormuz crisis: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य के बंद होने के बावजूद भारत की तेल आपूर्ति पर बड़ा असर नहीं पड़ा है। बल्कि तेल उत्पादक देशों के संगठन OPEC में आई दरार भारत के लिए फायदे का सौदा बन सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा बढ़ने से भारत को सस्ता और पर्याप्त तेल मिल सकता है।
सप्लाई में हल्की कमी
होर्मुज के बंद होने से भारत की तेल आपूर्ति में कुछ गिरावट जरूर आई है, लेकिन यह बहुत बड़ी नहीं है। अप्रैल में भारत को औसतन 44 लाख बैरल प्रतिदिन तेल मिला, जो सामान्य सप्लाई से थोड़ा कम है। हालांकि यह कमी इतनी नहीं है कि देश की ऊर्जा जरूरतों पर बड़ा संकट खड़ा हो।
सऊदी और यूएई ने बढ़ाई आपूर्ति
सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने वैकल्पिक रास्तों से भारत को तेल सप्लाई बढ़ा दी है। सऊदी अरब लाल सागर के रास्ते तेल भेज रहा है, जबकि यूएई फुजेराह पोर्ट के जरिए सप्लाई कर रहा है। इससे इराक से बंद हुई सप्लाई की भरपाई काफी हद तक हो रही है।
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नए देशों से बढ़ी खरीद
भारत ने ओमान और वेनेजुएला जैसे देशों से भी तेल आयात बढ़ा दिया है। इससे सप्लाई के स्रोत विविध हुए हैं और किसी एक क्षेत्र पर निर्भरता कम हुई है। यही वजह है कि संकट के बावजूद भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत बनी हुई है।
आगे और सस्ते तेल की उम्मीद
OPEC में मतभेद बढ़ने से तेल बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ सकती है, जिससे कीमतों में नरमी आ सकती है। ऐसे में भारत जैसे बड़े आयातक देश को इसका सीधा फायदा मिल सकता है। कुल मिलाकर, मौजूदा हालात भारत के लिए चुनौती के साथ-साथ अवसर भी लेकर आए हैं।