Mahua Moitra: कैश-फॉर-क्वेरी विवाद में तृणमूल कांग्रेस की सांसद महुआ मोइत्रा को दिल्ली हाई कोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। हाई कोर्ट ने उनके खिलाफ सीबीआई द्वारा चार्जशीट दाखिल करने के लिए लोकपाल की ओर से दी गई मंजूरी को रद्द कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि लोकपाल की प्रक्रिया में खामियां थीं, इसलिए यह अनुमति टिकाऊ नहीं है। जस्टिस अनिल क्षेत्रपाल और जस्टिस हरीश वैद्यनाथन शंकर की खंडपीठ ने महुआ मोइत्रा की याचिका को स्वीकार करते हुए लोकपाल को निर्देश दिया कि वह इस पूरे मामले पर कानून के प्रावधानों के तहत दोबारा विचार करे और एक महीने के भीतर नया फैसला ले।
क्या हैं आरोप
यह मामला वर्ष 2024 के कथित कैश-फॉर-क्वेरी प्रकरण से जुड़ा है। आरोप है कि महुआ मोइत्रा ने एक कारोबारी से नकद और उपहार लेने के बदले संसद में सवाल पूछे। इसी आधार पर सीबीआई ने लोकपाल के निर्देश पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की थी। बाद में लोकपाल ने सीबीआई को चार्जशीट दाखिल करने की मंजूरी दी थी, जिसे महुआ मोइत्रा ने दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी थी। अदालत ने माना कि मंजूरी देने से पहले लोकपाल द्वारा तय कानूनी प्रक्रिया का पूरी तरह पालन नहीं किया गया।
अगला कदम क्या होगा
सुनवाई के दौरान महुआ मोइत्रा की ओर से दलील दी गई कि लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम की धारा 20 के तहत जरूरी प्रक्रिया अपनाए बिना अनुमति दी गई, जो कानून के खिलाफ है। वहीं सीबीआई ने याचिका का विरोध किया था। हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद लोकपाल की मंजूरी को रद्द कर दिया और साफ किया कि यह अंतिम फैसला नहीं है। अब लोकपाल को पूरे मामले की दोबारा समीक्षा करनी होगी। नए निर्णय के बाद ही यह तय हो पाएगा कि आगे जांच और कानूनी कार्रवाई किस दिशा में जाएगी।