
नरक चतुर्दशी, जिसे रूप चौदस या छोटी दीवाली के नाम से भी जाना जाता है, दीपावली से एक दिन पहले मनाई जाती है। यह तिथि धार्मिक और आध्यात्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन विशेष पूजा और उपायों से व्यक्ति अपने जीवन से पाप, रोग, भय और विशेष रूप से अकाल मृत्यु जैसी आशंकाओं को दूर कर सकता है। इस अवसर पर कुछ खास धार्मिक उपायों को करने से जीवन में सुख, समृद्धि और स्वास्थ्य की वृद्धि होती है। इन्हीं उपायों में एक अत्यंत फलदायी उपाय है — चौमुखा दीपक जलाना।
चौमुखी दीपक का महत्व
नरक चतुर्दशी की रात चौमुखा दीपक जलाने की परंपरा शास्त्रों में बताई गई है। यह दीपक चार दिशाओं में जलने वाली चार बातियों वाला होता है, जो जीवन के चारों ओर से आने वाले संकटों से रक्षा करता है। इसका प्रकाश घर में सकारात्मक ऊर्जा को आमंत्रित करता है और नकारात्मक शक्तियों का नाश करता है। धार्मिक मान्यता है कि चौमुखा दीपक जलाने से यमराज प्रसन्न होते हैं और व्यक्ति को लंबी उम्र एवं भयमुक्त जीवन का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
चौमुखी दीपक जलाने की विधि
इस उपाय को करने से पहले स्नान आदि करके शरीर और मन को शुद्ध करना आवश्यक होता है। नरक चतुर्दशी की सुबह उबटन लगाकर अभ्यंग स्नान करें। फिर पूजा के लिए पीतल, मिट्टी या तांबे का चौमुखा दीपक लें। दीपक में शुद्ध गाय का घी या तिल का तेल भरें और चार बातियों को चारों दिशाओं की ओर रखकर जलाएं। दीपक को घर के मुख्य द्वार या पूजा स्थान पर रखें। इस समय “ॐ यमाय नमः” मंत्र का जाप करें और यमराज से प्रार्थना करें कि आपके जीवन से सभी प्रकार के संकट, भय और दोष समाप्त हों। इस उपाय को श्रद्धा और संकल्प के साथ करें।
क्या लाभ मिलते हैं इस उपाय से?
ऐसा माना जाता है कि चौमुखा दीपक जलाने से जीवन में फैली नकारात्मकता समाप्त होती है और मानसिक भय, विशेषकर अकाल मृत्यु का डर समाप्त होता है। यह उपाय न केवल स्वास्थ्य की रक्षा करता है, बल्कि घर में सुख-शांति और समृद्धि भी बढ़ाता है। इस उपाय को करने वाला व्यक्ति यमराज की कृपा से दीर्घायु, रोगमुक्त और सफल जीवन जीता है। साथ ही, जीवन में आने वाले अनचाहे संकट और बाधाएं स्वतः दूर होने लगती हैं।