Protests Against Gyanesh Kumar: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर विवाद एक बार फिर तेज हो गया है। कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP ने 10 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि अगर ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो देशभर से समर्थक दिल्ली पहुंचेंगे। यह घोषणा 2 अक्टूबर को मुंबई में हुए प्रदर्शन के बाद की गई है।
इस्तीफा देना और हटाया जाना अलग बात
यहां सबसे जरूरी बात यह है कि इस्तीफा और पद से हटाया जाना एक जैसी प्रक्रिया नहीं है। कानून के अनुसार मुख्य चुनाव आयुक्त खुद अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इसके लिए उन्हें राष्ट्रपति को लिखित रूप में अपना इस्तीफा देना होता है। यानी किसी प्रदर्शन या राजनीतिक मांग के बाद इस्तीफा देना उनका व्यक्तिगत फैसला होगा।
CEC को हटाने के लिए संविधान में खास सुरक्षा
अगर सवाल पद से हटाने का है तो प्रक्रिया काफी अलग और कठिन है। संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को उसी तरीके और उन्हीं आधारों पर हटाया जा सकता है, जिस तरीके से सुप्रीम कोर्ट के किसी न्यायाधीश को हटाया जाता है। यानी सामान्य सरकारी आदेश से CEC को पद से हटाया नहीं जा सकता।
संसद में प्रस्ताव से शुरू होती है प्रक्रिया
मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की कार्रवाई संसद से शुरू होती है। इसके लिए लोकसभा में कम से कम 100 सांसद या राज्यसभा में कम से कम 50 सांसद प्रस्ताव पर हस्ताक्षर कर सकते हैं। प्रस्ताव स्वीकार होने के बाद जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई जाती है। इसमें सुप्रीम कोर्ट के एक न्यायाधीश, हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश और एक प्रतिष्ठित कानून विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
आरोप साबित होने पर आगे बढ़ता है मामला
जांच समिति अगर लगाए गए आरोपों को साबित मानती है तो मामला संसद में आगे बढ़ता है। इसके बाद दोनों सदनों में तय विशेष बहुमत से प्रस्ताव पारित होना जरूरी होता है। दोनों सदनों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद राष्ट्रपति के पास हटाने का प्रस्ताव भेजा जाता है। इसलिए जंतर-मंतर पर प्रदर्शन और संवैधानिक रूप से CEC को हटाने की प्रक्रिया, दोनों अलग-अलग चीजें हैं।
इस समय CJP का आंदोलन
मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे और चुनावी मतदाता सूची से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर लगाए जा रहे आरोपों पर केंद्रित है। चुनाव आयोग ने अपने स्तर पर मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर की समीक्षा के लिए समिति बनाने की जानकारी भी दी है। हालांकि CJP की ओर से लगाए गए आरोपों को संगठन के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
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