भारत और नेपाल के रिश्तों में पिछले कुछ महीनों से जारी कूटनीतिक हलचल के बीच एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री से मुलाकात की है। खास बात यह है कि करीब छह महीने पहले शाह ने कथित तौर पर मिस्री से मुलाकात करने से इनकार कर दिया था, जिसके बाद उनका नेपाल दौरा टालना पड़ा था। अब दोनों के बीच हुई बातचीत को भारत-नेपाल संबंधों में आई नई सक्रियता के तौर पर देखा जा रहा है।
यह मुलाकात 5 नवंबर को काठमांडू में हुई। विक्रम मिस्री 4 और 5 नवंबर को नेपाल के आधिकारिक दौरे पर थे। उन्होंने प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह से मुलाकात के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश भी पहुंचाया। बातचीत में दोनों देशों के बीच सहयोग और शाह की प्रस्तावित भारत यात्रा के एजेंडे पर चर्चा हुई।
छह महीने पहले क्यों टल गया था विक्रम मिस्री का दौरा?
दरअसल, भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री को 11 और 12 मई 2026 को नेपाल का दौरा करना था। इस यात्रा का मकसद नेपाल की नई सरकार के साथ बातचीत करना और द्विपक्षीय संबंधों को आगे बढ़ाने के रास्ते तलाशना था। हालांकि, दौरा अचानक टाल दिया गया।
नेपाल के अखबार 'काठमांडू पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने विदेश सचिव स्तर के अधिकारियों से मुलाकात को लेकर अनिच्छा दिखाई थी। रिपोर्ट में दावा किया गया था कि शाह एक ऐसे प्रोटोकॉल पर चल रहे थे, जिसके तहत वे विदेश मंत्री के स्तर से नीचे के विदेशी अधिकारियों से आमने-सामने मुलाकात नहीं करना चाहते थे।
हालांकि, भारत की ओर से दौरा टालने की कोई स्पष्ट आधिकारिक वजह नहीं बताई गई थी। उस समय भारत और नेपाल के बीच लिपुलेख दर्रे को लेकर भी विवाद चल रहा था। भारत और चीन के बीच लिपुलेख के रास्ते कैलाश मानसरोवर यात्रा दोबारा शुरू करने पर सहमति बनने के बाद नेपाल ने इस क्षेत्र पर अपना दावा जताया था।
अब क्यों बदला नेपाल के प्रधानमंत्री का रुख?
सवाल है कि जिस मुलाकात को छह महीने पहले तवज्जो नहीं दी गई, अब उसके लिए प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह क्यों तैयार हो गए? इसके पीछे कई कूटनीतिक और आर्थिक कारण माने जा रहे हैं। सबसे अहम वजह शाह की प्रस्तावित भारत यात्रा है। प्रधानमंत्री बनने के बाद यह उनकी पहली द्विपक्षीय विदेश यात्रा होगी। दोनों देशों के अधिकारी इस यात्रा को सफल बनाने के लिए एजेंडा और संभावित समझौतों पर काम कर रहे हैं। ऐसे में भारतीय विदेश सचिव के साथ बातचीत को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
परियोजनाओं में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका
दूसरी वजह नेपाल की आर्थिक जरूरतें भी हैं। नेपाल भारत का एक प्रमुख व्यापारिक साझेदार है। बिजली, ऊर्जा, व्यापार, परिवहन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी कई परियोजनाओं में भारत की महत्वपूर्ण भूमिका है। नेपाल को विकास और पुनर्निर्माण के लिए भी भारत के सहयोग की जरूरत है।
इसके अलावा अगस्त में नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद भारत ने राहत सामग्री और बचाव दल भेजकर मदद की थी। मुलाकात के दौरान बालेंद्र शाह ने भारत की त्वरित सहायता और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से मिले समर्थन के लिए आभार जताया।
भारत से 2 अरब डॉलर से ज्यादा की मदद चाहता है नेपाल
नेपाल की भारत से आर्थिक सहायता की मांग भी इस पूरे घटनाक्रम में अहम है। 'काठमांडू पोस्ट' की रिपोर्ट के मुताबिक, नेपाल ने भारत के सामने 2 अरब डॉलर से अधिक के आर्थिक सहायता पैकेज का प्रस्ताव रखा है।