नई दिल्ली के कर्तव्य पथ पर 77वें गणतंत्र दिवस समारोह ने देशवासियों को गर्व और रोमांच से भर दिया। राष्ट्रपति की अगुवाई में हुई भव्य परेड में सैन्य ताकत, सांस्कृतिक विरासत और आत्मनिर्भर भारत की झलक देखने को मिली। फाइटर जेट्स के विशेष फॉर्मेशन, तीनों सेनाओं की संयुक्त झांकी और राज्यों की रंग-बिरंगी प्रस्तुतियों ने पूरे माहौल को देशभक्ति से सराबोर कर दिया।
सैन्य शक्ति का शानदार आगाज़
परेड की शुरुआत सेना के बैंड द्वारा ढोल और शहनाई पर ‘वंदे मातरम्’ की धुन से हुई। इस वर्ष का मुख्य विषय “वंदे मातरम के 150 वर्ष” रखा गया, जिसने समारोह को ऐतिहासिक भावनाओं से जोड़ दिया। प्रधानमंत्री ने पहले राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पहुंचकर शहीदों को श्रद्धांजलि दी, जिसके बाद कर्तव्य पथ पर राष्ट्रपति ने कार्यक्रम का नेतृत्व किया। परेड लगभग डेढ़ घंटे तक चली और हर पल रोमांच से भरा रहा।
ऑपरेशन सिंदूर और वायुसेना का शौर्य प्रदर्शन
आसमान में भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का ध्वज लेकर उड़ते नजर आए, जबकि फाइटर जेट्स ने विशेष फॉर्मेशन बनाकर दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। तीनों सेनाओं की संयुक्त झांकी ने “एकजुटता के माध्यम से विजय” का संदेश दिया। पहली बार सेना का चरणबद्ध ‘बैटल ऐरे फॉर्मेट’ भी प्रदर्शित किया गया, जिसमें आधुनिक टोही वाहन और स्वदेशी हल्का बख्तरबंद विशेष वाहन शामिल रहे।
राज्यों की झांकियों में संस्कृति की झलक
गुजरात की झांकी में स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का संदेश उभरा, जहां ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और चरखे के प्रतीक ने स्वतंत्रता आंदोलन की याद दिलाई। असम की झांकी में पारंपरिक टेराकोटा कला को दर्शाया गया, जो वहां के शिल्पकारों की समृद्ध विरासत को उजागर करती है। इन झांकियों ने भारत की विविधता और सांस्कृतिक एकता को एक मंच पर प्रस्तुत किया।
विदेशी अतिथियों की मौजूदगी और अंतरराष्ट्रीय संदेश
समारोह में यूरोपीय संघ के प्रतिनिधिमंडल ने भी भाग लिया। उनके सैन्य दल ने राष्ट्रपति को सलामी दी, जिससे भारत की वैश्विक कूटनीतिक भूमिका और रक्षा सहयोग का संदेश सामने आया। अंतरराष्ट्रीय मेहमानों की मौजूदगी ने इस आयोजन को और भी विशेष बना दिया।
सीमा पर सतर्कता और सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम
गणतंत्र दिवस के अवसर पर देश की सीमाओं पर चौकसी बढ़ा दी गई थी। भारत-नेपाल सीमा पर सशस्त्र बलों ने सड़कों, जंगलों और जल क्षेत्रों में 24 घंटे निगरानी रखी। राजधानी सहित पूरे देश में सुरक्षा के व्यापक इंतज़ाम किए गए, ताकि उत्सव शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न हो सके।