Republic Day 2026: 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत ने बिहार के मुजफ्फरपुर में तिरंगा फहराया। इस दौरान उन्होंने देशवासियों से एकजुट होकर भारत को दुनिया का सिरमौर बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता के बाद देश को चलाने की जिम्मेदारी अब स्वयं नागरिकों के हाथ में है और लोकतंत्र की मजबूती इसी सहभागिता पर निर्भर करती है।
लोकतंत्र, जनभागीदारी का महत्व
डॉ. भागवत ने कहा कि लंबे संघर्ष के बाद देश को आज़ादी मिली और अब लोग अपने प्रतिनिधि चुनकर शासन व्यवस्था में भाग लेते हैं। यही गणराज्य की असली ताकत है। उन्होंने जोर दिया कि सभी नागरिकों को मिलकर देश के विकास और शांति के संदेश को विश्व तक पहुंचाना चाहिए।
तिरंगे के रंग, सांस्कृतिक अर्थ
उन्होंने राष्ट्रीय ध्वज के रंगों का महत्व बताते हुए कहा कि भगवा रंग त्याग और संस्कृति का प्रतीक है, सफेद रंग शांति और हरा रंग समृद्धि को दर्शाता है। ध्वज के केंद्र में स्थित चक्र निरंतरता और अनुशासन का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि संविधान हमें धर्म, कर्तव्य और अधिकारों के संतुलन का मार्ग दिखाता है।
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संविधान, कानून पालन का संदेश
सरसंघचालक ने कहा कि कानून और नियम समाज को दिशा देते हैं। यदि किसी कानून में बदलाव जरूरी है तो उसे संवैधानिक तरीके से किया जाना चाहिए, लेकिन जब तक बदलाव न हो, उसका पालन करना सभी का दायित्व है। परंपराएं और सामाजिक मर्यादाएं भी उतनी ही आवश्यक हैं, क्योंकि वही जीवन को संस्कारित बनाती हैं।
लोकतांत्रिक विरासत, राष्ट्रीय संकल्प
इसी अवसर पर आरएसएस के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने दिल्ली में ध्वज वंदन करते हुए कहा कि भारत एक यशस्वी और उज्ज्वल लोकतंत्र के रूप में विश्व में पहचाना जाता है। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस राष्ट्रीय ध्वज, संवैधानिक मूल्यों और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा व संवर्धन का संकल्प दोहराने का अवसर है।