मध्य प्रदेश सरकार ने जनजातीय कार्य विभाग के कन्या शिक्षा परिसरों का नामकरण ‘माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर’ करने का आदेश जारी किया है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने शहडोल प्रवास के दौरान यह ऐलान किया था। इस कदम का उद्देश्य जनजातीय बालिकाओं को बेहतर शिक्षा, पोषण और सुरक्षा प्रदान कर उनके सशक्तिकरण को बढ़ावा देना है। प्रदेश में कुल 82 कन्या शिक्षा परिसर एवं 8 आदर्श आवासीय विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं।
माता शबरी के नाम पर होगा शिक्षा का नया अध्याय
मध्य प्रदेश सरकार ने जनजातीय वर्ग की बालिकाओं की शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कन्या शिक्षा परिसरों का नाम ‘माता शबरी आवासीय कन्या शिक्षा परिसर’ रखने का निर्णय लिया। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने हाल ही में शहडोल प्रवास के दौरान इस ऐलान को किया था। राज्य सरकार ने इस पर आधिकारिक आदेश जारी कर दिए हैं। यह पहल विशेष रूप से आदिवासी बालिकाओं को शिक्षा, पोषण और विकास के नए अवसर देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कन्या शिक्षा परिसरों में दी जा रही सुविधाएं
प्रदेश सरकार की योजना के तहत इन परिसरों में छात्राओं को न केवल शिक्षा दी जाती है, बल्कि आवासीय सुविधा भी उपलब्ध कराई जाती है। छात्राओं को यूनिफॉर्म, ब्लू ब्लेजर, किताबें, स्टेशनरी, पोषण आहार तथा चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। प्रति छात्रा को प्रतिवर्ष 15 हजार रुपए दिए जाते हैं। प्रत्येक विद्यालय में खेल, सांस्कृतिक और शैक्षणिक गतिविधियों के साथ प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, आकस्मिक चिकित्सा सुविधाएं भी संचालित की जाती हैं। प्रति विद्यालय 7 लाख 10 हजार रुपए का वार्षिक व्यय रखा गया है।
विद्यार्थी संख्या का विवरण
कन्या शिक्षा परिसरों में कक्षा 6वीं से 12वीं तक प्रति कक्षा 70 छात्राओं के आधार पर कुल 490 छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रही हैं। वहीं आदर्श आवासीय विद्यालयों में प्रति कक्षा 35 छात्राओं के आधार पर कुल 245 छात्राएं अध्ययनरत हैं। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि जनजातीय बालिकाओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और सुरक्षित वातावरण प्राप्त हो।