अयोध्या के डिप्टी कमिश्नर प्रशांत कुमार सिंह अचानक उस समय चर्चा में आए जब उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के समर्थन में भावुक इस्तीफा दिया। उन्होंने शंकराचार्य की टिप्पणी का विरोध करते हुए खुद को सरकार और मुख्यमंत्री के प्रति निष्ठावान बताया। लेकिन इस्तीफे के कुछ ही समय बाद उनकी पूरी कहानी पलटती नजर आई। अब उन पर फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी पाने का गंभीर आरोप लग गया है।
बीजेपी से विधायक बनने की थी चाह
अब जो नया खुलासा हुआ है उसने मामले को और बड़ा बना दिया है। जानकारी के मुताबिक प्रशांत कुमार सिंह ने 2022 में मऊ जिले से बीजेपी के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ने की दावेदारी की थी। उस समय वे जीएसटी विभाग में असिस्टेंट कमिश्नर के पद पर तैनात थे। उन्होंने स्थानीय स्तर पर बैनर और पोस्टर लगवाकर अपने लिए राजनीतिक माहौल भी बनाया था। हालांकि पार्टी से टिकट नहीं मिला और उन्होंने नौकरी जारी रखी।
नौकरी से प्रमोशन और अयोध्या पोस्टिंग
टिकट न मिलने के बाद प्रशांत कुमार सिंह ने इस्तीफा नहीं दिया। समय के साथ उन्हें प्रमोशन मिला और वे डिप्टी कमिश्नर बने। अक्टूबर 2023 में उनकी पोस्टिंग अयोध्या में हुई। प्रशासनिक जिम्मेदारियों के साथ वे शांत तरीके से काम कर रहे थे। लेकिन इस्तीफे के बाद अचानक पुराने मामले सामने आने लगे और अब उनकी भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
ये भी पढ़ें : China की चाल से सस्ती होंगी दवाइयां, API के दाम गिरे तो क्या India में कम हो जाएगा इलाज का खर्च ?
भाई ने लगाए फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आरोप
सबसे बड़ा आरोप उनके सगे बड़े भाई डॉ विश्वजीत सिंह ने लगाया है। उनका दावा है कि प्रशांत कुमार सिंह ने फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के आधार पर सरकारी नौकरी हासिल की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में ही इस मामले की शिकायत की गई थी और मेडिकल बोर्ड के सामने पेश होने के लिए प्रशांत को बुलाया गया था। लेकिन वे दो बार बोर्ड के सामने पेश नहीं हुए।
इस्तीफे को बताया जांच से बचने की कोशिश
डॉ विश्वजीत सिंह का कहना है कि इस्तीफा देना सिर्फ भावनात्मक फैसला नहीं बल्कि जांच से बचने का तरीका भी हो सकता है। उनका आरोप है कि जिस आंख की बीमारी दिखाकर दिव्यांग प्रमाण पत्र बनवाया गया वह आमतौर पर कम उम्र में नहीं होती। अब इस पूरे मामले की जांच मुख्य चिकित्सा अधिकारी मऊ की ओर से शुरू कर दी गई है और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट अहम मानी जा रही है।
प्रशासनिक अफसर से राजनीतिक आकांक्षा तक
प्रशांत कुमार सिंह मूल रूप से मऊ जिले के रहने वाले हैं और उनकी पोस्टिंग सहारनपुर कानपुर और अयोध्या जैसे जिलों में रही है। इस्तीफे के वक्त उन्होंने आत्मसम्मान और परिवार की जिम्मेदारी की बात कही थी। लेकिन अब सामने आए तथ्यों से साफ है कि वे सिर्फ प्रशासन तक सीमित नहीं रहना चाहते थे बल्कि राजनीति में भी उतरने की तैयारी कर चुके थे। अब जांच के नतीजे तय करेंगे कि यह मामला कहां तक जाता है।