मध्यप्रदेश में नेताओं के बिगड़े बोल अब भाजपा के लिए गले की फांस बनते जा रहे हैं। सेना, ऑपरेशन सिंदूर और महिला अफसरों पर आपत्तिजनक बयानों से पार्टी की छवि को लगातार नुकसान हो रहा है। हालात ऐसे बन गए हैं कि अब भारतीय जनता पार्टी अपने मंत्रियों और विधायकों को संवेदनशील मुद्दों पर बोलने की विशेष ट्रेनिंग देने जा रही है। मीडिया सूत्रों के मुताबिक, जून में यह ट्रेनिंग भोपाल से बाहर आयोजित हो सकती है, जिसमें यह सिखाया जाएगा कि क्या बोलना है और क्या नहीं। हालांकि पार्टी की ओर से इस पर आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन यह खबर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बन गई है।
नेताओं के बयानों से पार्टी की फजीहत
हाल ही में मंत्री विजय शाह ने सेना की महिला अफसर कर्नल सोफिया कुरैशी को लेकर विवादास्पद बयान दिया, जिसमें उन्होंने उन्हें आतंकियों की बहन तक कह डाला। यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया है। वहीं, उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा ने भी एक कार्यक्रम में कहा, “देश और सेना प्रधानमंत्री मोदी के चरणों में नतमस्तक है”, जिस पर विपक्ष ने तीखी आपत्ति जताई और भाजपा को घेर लिया।
जून में हो सकती है ट्रेनिंग, तय होंगे बोलने के नियम
सूत्रों का कहना है कि एमपी बीजेपी जल्द ही मंत्रियों और विधायकों के लिए एक विशेष सत्र आयोजित करेगी। इस दौरान उन्हें सार्वजनिक मंचों पर जिम्मेदार और संतुलित बयानबाजी के बारे में प्रशिक्षण दिया जाएगा। बताया जा रहा है कि नेताओं को यह भी सख्ती से कहा गया है कि वे ऑपरेशन सिंदूर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बयान देने से पहले सोच-समझकर बोलें।
राजनीति में बयानबाज़ी बनी बड़ा मुद्दा
राज्य में लगातार ऐसी घटनाएं सामने आई हैं, जब नेता सेना जैसे गंभीर विषयों पर अनुचित भाषा का प्रयोग करते नजर आए हैं। विपक्ष को भी ऐसे बयानों पर हमला करने का मौका मिल रहा है, जिससे भाजपा की साख को नुकसान हो रहा है।
सेना पर बयान देने से पहले ज़िम्मेदारी समझें
विशेषज्ञों का मानना है कि जिस सेना पर देश को गर्व है, उस पर अनर्गल बयानबाज़ी न केवल राजनीतिक नुकसान पहुंचाती है, बल्कि राष्ट्रीय भावना को भी आहत करती है। इसीलिए जरूरी है कि नेता सोच-समझकर बोलें और सेना जैसे विषयों पर गरिमा बनाए रखें।