कानपुर, जिले में एक साइबर ठग ने पॉवर ग्रिड कारपोरेशन से रिटायर्ड इंजीनियर राजेंद्र प्रसाद को डिजिटल अरेस्ट कर करीब 19 दिन में 42.50 लाख रुपये की ठगी कर ली. जालसाज ने खुद को पहले सीबीआई अफसर बताकर डराया और फिर मनी लॉड्रिंग मामले का हवाला देकर इंजीनियर को रौंब में लिया. पीड़ित राजेंद्र प्रसाद ने बताया कि अगस्त की 7 तारीख को उनके मोबाइल पर एक अनजान व्हाट्सएप कॉल आई। कॉल रिसीव की तो उसने खुद को सीबीआई में तैनात आईपीएस अधिकारी बताया और कहा कि उनके आधार कार्ड का इस्तेमाल करके मुंबई के एक बैंक में फर्जी खाता खोला गया है, जिसका उपयोग मनी लॉड्रिंग मामले में हुआ है.
जालसाज ने वीडियो कॉल पर उपस्थित रहने का दबाव बनाया. रिटायर्ड इंजीनियर राजेंद्र प्रसाद काफी डर गए। इसके बाद ठग ने उनके डर का फायदा उठाया और कहा कि आप को लगातार वीडियो कॉल पर रहना होगा और इस अवधि में किसी से बात नहीं होगी. इसके बाद साइबर ठग ने पीड़ित राजेंद्र प्रसाद को कई बार कॉल किया.
जालसाज ने कहा कि जांच के दौरान उनके सभी खातों में जमा रकम आरबीआई के बताए गए खातों में ट्रांसफर करनी होगी। जांच प्रक्रिया पूरी होने पर 72 घंटे के अंदर उनका रुपया फिर खातों में वापस कर दिया जाएगा. जिसके बाद रिटायर्ड इंजीनियर ने 7 से 25 अगस्त के बीच 5 बार में कुल 42.50 लाख रुपये मुंबई के कई खातों में आरटीजीएस कर दिए। कुछ दिनों बाद जब कॉल आना बंद हो गया तो पीड़ित को खुद के साथ ठगी होने का एहसास हुआ. जिसके बाद पीड़ित ने पुलिस व साइबर सेल में शिकायत की. डीसीपी साउथ दीपेंद्र नाथ चौधरी ने बताया कि कोई भी जांच एजेंसी डिजिटल अरेस्ट नहीं करती है। खुद को प्रभावशाली बताकर डर और भ्रम पैदा करके यह ठगी की गई है। साइबर थाने में मामला दर्ज कर लिया गया है।जांच की जा रही है.