मध्य प्रदेश के रीवा जिले की सोहागी घाटी में बीते गुरुवार को हुआ भीषण सड़क हादसा कई परिवारों के लिए कभी न भरने वाला ज़ख्म छोड़ गया। हादसे में 7 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जिनमें एक ही परिवार के तीन पीढ़ियों के सदस्य शामिल थे – दादा-दादी, माता-पिता और नाती-पोते। यह दृश्य किसी को भी भीतर तक झकझोर सकता है। परिवार का कोई सदस्य ज़िंदा नहीं बचा जो अपनों का अंतिम संस्कार कर सके। घर के चिराग ही नहीं, पूरा घर ही बुझ गया है। शोकाकुल रिश्तेदारों की आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं।
कैसे हुआ दर्दनाक हादसा?
गुरुवार को रीवा के सोहागी घाटी में सीमेंट पिलर से लदा एक भारी भरकम बल्कर ट्रक, एक ऑटो पर पलट गया। ऑटो में कुल 10 लोग सवार थे जबकि उसमें केवल 4 लोगों की अनुमति थी। यह ऑटो प्रयागराज से रीवा जा रहा था। हादसे में 7 लोगों की जान चली गई और 3 गंभीर रूप से घायल हुए। ये हादसा इतना भीषण था कि मौके पर ही कई शव क्षत-विक्षत हो गए।
लापरवाही बनी मौत की वजह
स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे की असली वजह आरटीओ और परिवहन विभाग की लापरवाही है। ट्रैफिक चेक पोस्ट के बावजूद ओवरलोड ऑटो को रोका नहीं गया। नतीजा यह हुआ कि एक पूरा परिवार खत्म हो गया। लोग अब सवाल उठा रहे हैं कि क्या इन चेक पोस्ट का कोई मतलब भी है?
घायलों की हालत गंभीर, इलाज जारी
सड़क हादसे में घायल हुए तीन लोगों का इलाज संजय गांधी अस्पताल में किया जा रहा है। डॉक्टरों के अनुसार, फिलहाल उनकी हालत स्थिर है लेकिन खतरा टला नहीं है। सीएम मोहन यादव ने हादसे पर दुख जताते हुए मृतकों के परिजनों को 2-2 लाख और घायलों को 50-50 हजार रुपए की आर्थिक मदद की घोषणा की है।
अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी कौन लेगा?
परिजनों का कहना है कि जब एक साथ दादा, पिता और बेटा चल बसे हों, तो अंतिम संस्कार कौन करेगा? पिंडदान और बाकी धार्मिक विधियां कौन निभाएगा? यह सवाल अब गांव वालों और प्रशासन के सामने खड़ा है। ये हादसा ना सिर्फ एक सड़क दुर्घटना है, बल्कि एक सामाजिक और मानवीय त्रासदी बन गया है।