मध्यप्रदेश के रीवा जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है, जिसने यह साबित कर दिया कि सरकारी योजनाएं सिर्फ आर्थिक सहायता ही नहीं, बल्कि सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ एक मजबूत हथियार भी बन सकती हैं। लाड़ली लक्ष्मी योजना के एक प्रमाण पत्र और एक सतर्क नागरिक की सजगता ने 16 वर्षीय नाबालिग बच्ची की शादी रुकवाकर उसकी जिंदगी बचा ली।
जवा थाना क्षेत्र में 27 मई को शादी तय थी, बारात आने ही वाली थी और मेहमानों की भीड़ घर में जुट चुकी थी। लेकिन इस बीच मिली शिकायत और लाड़ली प्रमाण पत्र की जांच ने प्रशासन को हरकत में ला दिया। पुलिस और महिला बाल विकास विभाग की टीम ने मौके पर पहुँचकर बाल विवाह को रुकवा दिया। अब यह मामला पूरे प्रदेश में सरकारी योजनाओं की सार्थकता और सामाजिक जिम्मेदारी का उदाहरण बन गया है।
मां-बाप ही कर रहे थे बाल विवाह की तैयारी
रीवा जिले के जवा थाना क्षेत्र के एक गांव में 16 साल की नाबालिग बेटी की शादी चकघाट के 22 वर्षीय युवक से तय कर दी गई थी। 27 मई को बारात आनी थी और घर में शादी की सभी रस्में लगभग पूरी हो चुकी थीं। लेकिन एक जागरूक व्यक्ति की शिकायत ने पूरा घटनाक्रम पलट दिया।
लाड़ली लक्ष्मी योजना बनी नारी सुरक्षा की ढाल
महिला एवं बाल विकास विभाग को मिली शिकायत के बाद मौके पर पहुँची टीम ने लाड़ली लक्ष्मी योजना के प्रमाण पत्र के माध्यम से लड़की की असली उम्र का पता लगाया। प्रमाण पत्र में दर्ज जन्मतिथि 5 दिसंबर 2008 थी, जिससे यह पुष्टि हो गई कि लड़की बालिग नहीं है। इसी आधार पर पुलिस और अधिकारियों ने विवाह रुकवा दिया।
प्रशासन की सतर्कता और सख्ती
एसपी ने जानकारी दी कि शिकायत मिलते ही त्वरित कार्रवाई की गई। यदि परिवार वाले बाल विवाह पर अड़े रहते तो उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई की जाती। इस कार्रवाई से यह संदेश गया कि प्रशासन, कानून और योजनाएं मिलकर समाज को सुरक्षित बना सकते हैं।
सरकारी योजनाओं का प्रभाव और जागरूकता जरूरी
यह घटना दर्शाती है कि सरकारी योजनाओं के दस्तावेज़ केवल कागज़ नहीं, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम बन सकते हैं। लाड़ली लक्ष्मी योजना का प्रमाण पत्र इस बच्ची के लिए जीवन रक्षा कवच साबित हुआ। ऐसे उदाहरण सामाजिक सुधार की दिशा में प्रेरणादायक हैं।