सौ सुनार की एक लुहार वाली कहावत को इस बार मैदान पर जिंदा कर दिया है रिंकू सिंह ने। विजय हजारे ट्रॉफी में जिस अंदाज में रिंकू ने चौके छक्कों की बरसात की है उसने क्रिकेट जगत को चौंका दिया है। 371 रन ठोककर उन्होंने यह साफ कर दिया कि वह सिर्फ नाम नहीं बल्कि मैच का रुख बदलने वाले खिलाड़ी हैं। जिस खिलाड़ी को लेकर सवाल उठते थे आज उसी के नाम का शोर हर तरफ सुनाई दे रहा है।
कप्तानी पारी जिसने बयान दे दिया
निरंजन शाह स्टेडियम में यूपी के कप्तान के तौर पर खेली गई 30 गेंदों में 57 रन की पारी सिर्फ अर्धशतक नहीं थी बल्कि एक सीधा संदेश थी। रिंकू ने गेंदबाजों की लाइन लेंथ बिगाड़ दी और रन गति इतनी तेज रखी कि टीम 339 रन तक पहुंच गई। इसके बाद 54 रनों की जीत ने उनकी कप्तानी पर भी मुहर लगा दी। लगातार 6 मैच और 6 जीत यह बताने के लिए काफी है कि मैदान पर उनका असर कितना गहरा है।
आंकड़े जो चयनकर्ताओं को मजबूर करें
इस सीजन विजय हजारे ट्रॉफी में रिंकू सिंह का प्रदर्शन किसी सुपरस्टार से कम नहीं रहा। 6 मैचों में 371 रन 123 से ज्यादा का औसत और 145 से ऊपर का स्ट्राइक रेट। एक शतक और तीन अर्धशतक के साथ 29 चौके और 14 छक्के यह आंकड़े हर फाइल में मोटे अक्षरों में लिखे जाने लायक हैं। यह प्रदर्शन दिखाता है कि रिंकू सिर्फ मौके का इंतजार नहीं कर रहे बल्कि उसे छीन रहे हैं।
वनडे से दूरी बनता सवाल
इतनी जबरदस्त फॉर्म के बावजूद सबसे बड़ा सवाल यही है कि रिंकू सिंह को वनडे में मौका क्यों नहीं मिल रहा। दो साल से ज्यादा समय हो चुका है जब उन्होंने आखिरी बार वनडे खेला था। दिसंबर 2023 के बाद से वह इस फॉर्मेट से बाहर हैं जबकि लिस्ट ए क्रिकेट में उनके आंकड़े और भी दमदार हैं। 62 पारियों में 2368 रन और 52 से ज्यादा का औसत साफ संकेत देता है कि काबिलियत में कोई कमी नहीं।
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टीम कॉम्बिनेशन की उलझन
असल कहानी टीम कॉम्बिनेशन में फंसती दिखती है। जिस मिडिल ऑर्डर स्लॉट पर रिंकू खेलते हैं वहां ऑलराउंडर्स की मौजूदगी को प्राथमिकता दी जाती है। लेकिन सवाल यह है कि क्या सिर्फ गेंदबाजी विकल्प के लिए ऐसी बल्लेबाजी को नजरअंदाज किया जा सकता है। रिंकू की खासियत यह है कि वह आखिरी ओवरों में भी मैच का नक्शा बदल देते हैं।
धोनी जैसी छाप और बड़ा सवाल
कप्तानी में रिंकू का शांत अंदाज कई लोगों को धोनी स्टाइल की याद दिला रहा है। कम बोलना सही फैसले और खिलाड़ियों का सही इस्तेमाल यही उनकी ताकत बन रही है। युवा खिलाड़ियों के लिए रिंकू अब प्रेरणा नहीं बल्कि सीधी चुनौती हैं। सवाल यही है कि T20 वर्ल्ड कप से पहले क्या टीम इंडिया इस दस्तक को नजरअंदाज कर पाएगी या फिर यह दरवाजा तोड़ने वाली एंट्री साबित होगी।