रिंकू सिंह ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उन्हें फिनिशर क्यों कहा जाता है। कोलकाता नाइट राइडर्स और लखनऊ सुपर जायंट्स के बीच खेले गए मुकाबले में रिंकू ने अपनी बल्लेबाजी और फील्डिंग से मैच का रुख पलट दिया। इकाना स्टेडियम में खेला गया यह मुकाबला सुपर ओवर तक गया, जहां रिंकू की सूझबूझ और प्रदर्शन ने KKR को जीत दिलाई।
“संकटमोचन” नाम से किया इनकार
मैच के बाद जब रिंकू सिंह को प्लेयर ऑफ द मैच का अवॉर्ड मिला, तो उनसे एक दिलचस्प सवाल पूछा गया। प्रजेंटर ने उन्हें “रिंकू संकटमोचन” कहने का सुझाव दिया, लेकिन रिंकू ने मुस्कुराते हुए इसे ठुकरा दिया। उन्होंने साफ कहा कि उन्हें सिर्फ “रिंकू” कहलाना ही पसंद है। उनका यह जवाब फैंस के बीच काफी चर्चा में आ गया।
बल्ले और फील्डिंग दोनों में जलवा
इस मैच में रिंकू सिंह ने 51 गेंदों पर नाबाद 83 रन बनाए, जिसमें 5 छक्के और 7 चौके शामिल थे। इतना ही नहीं, उन्होंने फील्डिंग में भी कमाल करते हुए 5 कैच लपके। सुपर ओवर में भी उनका योगदान अहम रहा, जहां उनके शॉट्स ने मैच KKR के पक्ष में कर दिया। मुश्किल हालात में टीम को संभालना उनकी सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आई।
जीत के पीछे की रणनीति का खुलासा
मैच के बाद रिंकू सिंह ने अपनी रणनीति भी साझा की। उन्होंने बताया कि उनका फोकस सिर्फ मैच को आखिर तक ले जाने पर था। वे जोखिम लेने के बजाय सही गेंद का इंतजार कर रहे थे और सिंगल-डबल से स्ट्राइक रोटेट करते रहे। इसी प्लान ने उन्हें बड़ी पारी खेलने में मदद की और टीम को जीत दिलाई।
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फैंस के बीच बढ़ी लोकप्रियता
इस शानदार प्रदर्शन के बाद रिंकू सिंह की लोकप्रियता और भी बढ़ गई है। लोग उन्हें अलग-अलग नामों से बुला रहे हैं, लेकिन खुद रिंकू की पसंद साफ है उन्हें बस उनके नाम से ही पहचाना जाए। मैदान पर उनके शांत स्वभाव और दबाव में खेलने की क्षमता उन्हें खास बनाती है। कुल मिलाकर, इस मुकाबले ने एक बार फिर दिखा दिया कि क्यों रिंकू सिंह टीम के सबसे भरोसेमंद खिलाड़ियों में गिने जाते हैं और क्यों उनका नाम ही उनके लिए सबसे बड़ी पहचान है।