देश में एक बार फिर महंगाई ने दस्तक दे दी है। एफएमसीजी कंपनियां अब तेल, साबुन, डिटर्जेंट, हेयर ऑयल, चॉकलेट, नूडल्स और अनाज जैसे रोजमर्रा के सामानों की कीमतें 5% तक बढ़ा रही हैं। सितंबर 2025 में जीएसटी कटौती के बाद कंपनियों ने दाम स्थिर रखे थे, लेकिन अब बढ़ती लागत और कमजोर रुपये के कारण मार्जिन पर दबाव बढ़ गया है। बढ़ी कीमतों वाले पैकेट बाजार में पहुंचने भी लगे हैं।
कच्चा तेल और रुपये की कमजोरी बना कारण
हाल के हफ्तों में कच्चे तेल की कीमतों में उछाल आया है, जिससे सल्फर, एन-पैराफिन और लिक्विड पैराफिन जैसे इनपुट महंगे हुए हैं। नारियल तेल की कीमतें पिछले साल के मुकाबले दोगुनी बताई जा रही हैं। दूसरी ओर रुपया डॉलर के मुकाबले गिरकर 92.02 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया था, जिससे आयात लागत और बढ़ गई। ब्रेकफास्ट प्रोडक्ट बनाने वाली Bagrry's ने भी चुनिंदा पैकेटों पर दाम बढ़ाने का संकेत दिया है।
ये भी पढ़ें : Holi पर घर जाना हुआ आसान, UP-Bihar रूट की स्पेशल ट्रेनों की पूरी लिस्ट देखें
बड़ी कंपनियों का रुख
Dabur India के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने बताया कि कंपनी इस तिमाही में करीब 2% कीमतें बढ़ा रही है और यह असर अगले साल तक रह सकता है। वहीं Hindustan Unilever के सीएफओ निरंजन गुप्ता ने निवेशकों से कहा कि होम केयर प्रोडक्ट्स जैसे सर्फ एक्सेल, रिन और विम में कीमत बढ़ोतरी दिखेगी। Tata Consumer Products ने भी चाय की कीमतों में समायोजन का संकेत दिया है।
मुनाफे पर दबाव
सिस्टमैटिक्स ग्रुप की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में 9% राजस्व वृद्धि के बावजूद एफएमसीजी कंपनियां मुनाफा बढ़ाने में संघर्ष कर रही हैं। जीएसटी कटौती से बिक्री मात्रा बढ़ी, लेकिन लागत में उछाल ने लाभप्रदता पर असर डाला है। कुल मिलाकर, कच्चे माल की महंगाई और रुपये की गिरावट ने उपभोक्ताओं की जेब पर नई मार डाली है।