राष्ट्रीय राजधानी में बढ़ता प्रदूषण लोगों के लिए बड़ा खतरा बन चुका है। वहीं, रविवार को वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CQM) के 26 फ्लाइंग स्क्वाड ने दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों में एक केंद्रित निरीक्षण अभियान चलाया। इसकी जानकारी एक आधिकारिक बयान के ओर से दी गई।
नियंत्रण उपायों को तीव्र करना है
निरीक्षण अभियान शनिवार को आयोग की ओर चलाया गया। यह प्रवर्तन कार्रवाइयों के एक भाग के रूप में चलाया गया। इसका लक्ष्य जमीनी स्तर पर निगरानी को मजबूत करना और वैधानिक ढांचे तथा मौजूदा गैप के तहत धूल नियंत्रण उपायों को तेज करना है।
प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना था
सीएक्यूएम के बयान के मुताबिक, इस अभियान का लक्ष्य सड़कों पर धूल के जमाव का पता करना है और दिल्ली नगर निगम (एमसीडी), नई दिल्ली नगर परिषद (NDMC) और केंद्रीय लोक कल्याण विभाग (CPWD) की ओर से कार्यान्वित की जा रही सफाई, झाड़ू लगाने, और धूल कम करने के उपायों की प्रभावशीलता का मूल्यांकन करना था।
तीनों एजेंसियों की सड़कों पर कुल 321 सड़क खंडों का निरीक्षण किया गया। जियो-टैग्ड, टाइम-स्टैम्प्ड फोटोग्राफिक दस्तावेज एकत्र किए गए। समेकित निरीक्षण रिपोर्ट के भाग के रूप में आयोग को प्रस्तुत किए गए।
35 सड़क खंडों पर धूल का उच्च स्तर पाया गया
अंतिम संकलित आंकड़ों के मुताबिक, 35 सड़क खंडों पर धूल का उच्च स्तर पाया गया। 61 पर मध्यम, 94 पर कम धूल की तीव्रता दर्ज की गई। 131 हिस्सों में धूल नहीं दिखी। एमसीडी के अंतर्गत, जहां सबसे अधिक संख्या में सड़कें (182) का निरीक्षण किया गया। 35 हिस्सों में धूल की उच्च तीव्रता देखी गई। वहीं 50 में मध्यम, 70 में कम और 27 हिस्सों में धूल नहीं दिखी।
100 में कोई धूल नहीं दिखी।
इसके विपरीत, एनडीएमसी क्षेत्र में अपेक्षाकृत बेहतर प्रदर्शन रहा। एनडीएमसी क्षेत्र में 133 सड़क खंडों का निरीक्षण किया गया। इनमें से 100 में कोई धूल नहीं दिखी। 24 में धूल कम दर्ज की गई और 9 में मध्यम धूल की तीव्रता दर्ज की गई । कोई भी हिस्सा ज्यादा धूल की तीव्रता वाली कैटेगरी में नहीं आया।
सड़क की धूल पार्टिकुलेट मैटर का एक बड़ा कारण
इसी तरह, सीपीडब्ल्यू ने 6 सड़कों का निरीक्षण किया। इस दौरान कोई भी सड़क अत्याधिक धूल वाली नहीं पाई गई। दो सड़कों पर मध्यम धूल पाई गई। चार सड़कों पर कोई धूल की तीव्रता नहीं देखी गई। सीएक्यूएम ने बताया कि दिल्ली में खासकर विंटर में सड़क की धूल पार्टिकुलेट मैटर का एक बड़ा कारण है।
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