रोहित शर्मा को लेकर पिछले कुछ महीनों से लगातार चर्चा हो रही थी। वनडे टीम की कप्तानी शुभमन गिल को मिलने के बाद रोहित की भूमिका बदल गई। अब उनकी जगह सिर्फ प्रदर्शन के आधार पर तय हो रही है। इसी वजह से हर पारी पर नजरें थीं और सवाल उठ रहे थे कि क्या वह 2027 वर्ल्ड कप तक खेल पाएंगे।
युवा खिलाड़ियों से मिल रही चुनौती
टीम इंडिया में ओपनिंग के लिए कई नए चेहरे मौजूद हैं। यशस्वी जायसवाल, ऋतुराज गायकवाड़ और शुभमन गिल जैसे बल्लेबाज लगातार दावेदारी पेश कर रहे हैं। ऐसे में माना जा रहा था कि चयनकर्ता धीरे-धीरे भविष्य की टीम तैयार करने पर ध्यान देंगे। इसी कारण रोहित के भविष्य को लेकर चर्चा और तेज हो गई थी।
रन बने, लेकिन बड़ी पारी नहीं आई
ऑस्ट्रेलिया दौरे में रोहित ने 73 और नाबाद 121 रन की पारी खेलकर अपनी क्षमता दिखाई थी। लेकिन उसके बाद कई मुकाबलों में अच्छी शुरुआत मिलने के बावजूद वह बड़ी पारी नहीं खेल पाए। कुछ अर्धशतक जरूर आए, लेकिन ऐसा प्रदर्शन नहीं हुआ जो सभी सवालों को शांत कर सके। इंग्लैंड के खिलाफ शुरुआती वनडे मैचों में भी उनका बल्ला ज्यादा नहीं चला।
लॉर्ड्स में आया बड़ा मोड़
फिर इंग्लैंड के खिलाफ लॉर्ड्स वनडे में रोहित शर्मा ने शानदार बल्लेबाजी की। 388 रन के बड़े लक्ष्य का पीछा करते हुए उन्होंने सिर्फ 110 गेंदों में 138 रन बना डाले। इस पारी में 17 चौके और 5 छक्के शामिल रहे। भारत मैच नहीं जीत सका, लेकिन रोहित ने अपनी बल्लेबाजी से एक बार फिर साबित कर दिया कि बड़े मैचों में वह अब भी मैच का रुख बदल सकते हैं।
सेलेक्टर्स के लिए बढ़ी मुश्किल
इस शतक के बाद चर्चा का रुख बदल गया। पहले सवाल यह था कि रोहित को कब तक मौका मिलेगा, लेकिन अब सवाल यह है कि ऐसे प्रदर्शन के बाद उन्हें बाहर कैसे रखा जाए। हालांकि सिर्फ एक पारी से 2027 वर्ल्ड कप की जगह तय नहीं होती, लेकिन इस प्रदर्शन ने रोहित को फिर से मजबूत दावेदारों की सूची में ला खड़ा किया है।
अब आगे होगी असली परीक्षा
वेस्टइंडीज के खिलाफ वनडे सीरीज से रोहित शर्मा के लिए एक नया दौर शुरू होगा। इसके बाद न्यूजीलैंड, श्रीलंका और जिम्बाब्वे के खिलाफ भी वनडे मुकाबले खेले जाने हैं। यही मैच तय करेंगे कि 2027 वर्ल्ड कप की टीम में कौन जगह बनाएगा। फिलहाल इतना जरूर है कि लॉर्ड्स में खेली गई 138 रन की पारी ने रोहित शर्मा को लेकर चल रही पूरी बहस का रुख बदल दिया है और उन्हें नजरअंदाज करना अब आसान नहीं होगा।