भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार तेज रफ्तार से आगे बढ़ रही है। अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी मान रही हैं कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था बना रहेगा। सरकार के विकसित भारत विजन के तहत कई वैश्विक कंपनियां यहां निवेश बढ़ाने की तैयारी में हैं। अब लग्जरी इंजीनियरिंग कंपनी Rolls-Royce ने भी भारत में अपना दायरा बढ़ाने का संकेत दिया है।
PM मोदी से हुई अहम मुलाकात
कंपनी के सीईओ तुफान एर्गिनबिलगिक ने प्रधानमंत्री Narendra Modi से मुलाकात की। इस दौरान उन्होंने भारत में गतिविधियां बढ़ाने और दीर्घकालिक साझेदारी पर चर्चा की। मुलाकात के बाद प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के युवाओं की प्रतिभा और नवाचार क्षमता के साथ मिलकर काम करना उत्साहजनक होगा। सरकार ने भी कंपनी के विस्तार की इच्छा का स्वागत किया है।
क्या है कंपनी की योजना?
कंपनी की ओर से बताया गया कि वह भारत में अपना ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर और मजबूत करना चाहती है। इसके साथ ही जटिल निर्माण परियोजनाओं में सहयोग, हाई-वैल्यू इंजीनियरिंग और नई तकनीकों के विकास पर ध्यान दिया जाएगा। कंपनी भारत को सिर्फ बाजार नहीं बल्कि एक रणनीतिक साझेदार के रूप में देख रही है।
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भारत को घरेलू बाजार बनाने की सोच
पिछले साल भी कंपनी के सीईओ ने संकेत दिए थे कि भारत को वे एक अहम घरेलू बाजार के तौर पर विकसित करना चाहते हैं। इसका मतलब है कि यहां सिर्फ बिक्री ही नहीं, बल्कि रिसर्च, निर्माण और डिजाइन जैसे बड़े काम भी किए जा सकते हैं। इससे भारत में रोजगार और तकनीकी विकास को बढ़ावा मिलेगा।
आत्मनिर्भर भारत में योगदान
Rolls-Royce ने कहा है कि वह स्थानीय साझेदारों के साथ काम बढ़ाएगी। भारतीय सप्लायर्स से खरीद बढ़ाने, कौशल विकास में निवेश करने और इंजीनियरिंग क्षमता मजबूत करने की योजना है। यह कदम आत्मनिर्भर भारत लक्ष्य के अनुरूप माना जा रहा है।
बेंगलुरु में बड़ा विस्तार
हाल ही में कंपनी ने बेंगलुरु में अपने विस्तारित ग्लोबल कैपेबिलिटी और इनोवेशन सेंटर की शुरुआत की है। इससे साफ है कि भारत कंपनी की लंबी रणनीति का अहम हिस्सा बन चुका है। आने वाले समय में यह साझेदारी भारत के औद्योगिक और तकनीकी क्षेत्र के लिए नई संभावनाएं खोल सकती है।