मणिपुर के तीन दिवसीय दौरे पर पहुंचे मोहन भागवत ने इम्फाल में जनजातीय और युवा नेताओं के साथ मुलाकात कर सामाजिक एकता और संवाद की अपील की। उन्होंने कहा कि भारत की विविधता ही इसकी ताकत है, और परिवार की तरह समाज के मुद्दों का समाधान भी भीतर से ही होना चाहिए। भागवत ने स्पष्ट किया कि उनका संगठन समाज को जोड़ने और जिम्मेदार नागरिक तैयार करने का काम करता है।
मणिपुर में सामाजिक एकता का आह्वान
दौरे के दूसरे दिन मोहन भागवत ने विभिन्न जनजातीय समूहों के प्रतिनिधियों से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि किसी भी समाज की मजबूती उसके आपसी विश्वास और साझा चेतना पर निर्भर करती है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे विविधता को स्वीकार कर एक सभ्यतागत परिवार के रूप में आगे बढ़ें।
संगठन की भूमिका को लेकर दिया स्पष्ट संदेश
भागवत ने कहा कि उनका संगठन किसी के खिलाफ नहीं है और न ही किसी प्रकार का राजनीतिक नियंत्रण करता है। यह केवल सामाजिक सद्भाव, मित्रता और सेवा की भावना पर चलता है। उन्होंने बताया कि समाज को समृद्ध करना ही इसका प्रमुख उद्देश्य है।
मुद्दों का समाधान संवैधानिक दायरे में हो
जनजातीय नेताओं द्वारा उठाए गए कई स्थानीय मुद्दों पर उन्होंने कहा कि ये राष्ट्रीय स्तर की चिंताएँ हैं और इनका समाधान संवैधानिक व्यवस्था के भीतर ही होना चाहिए। उनका कहना था कि संवाद सौदेबाजी पर नहीं, आपसी एकता और समझ पर आधारित होना चाहिए।
परंपराओं और संस्कृति पर गर्व करने की अपील
भागवत ने कहा कि कई क्षेत्रीय मतभेदों की जड़ें औपनिवेशिक दौर में हैं। उन्होंने जनजातीय समाज से अपनी भाषाओं, लिपियों और परंपराओं को अपनाने तथा सांस्कृतिक पहचान को मजबूत करने का आग्रह किया।
युवाओं को राष्ट्र निर्माण में सक्रिय होने का संदेश
युवा नेताओं के साथ चर्चा में उन्होंने कहा कि भारत कोई नया राष्ट्र नहीं, बल्कि प्राचीन और सतत सभ्यता है। उन्होंने युवाओं से जिम्मेदार नागरिक बनने और अपने कौशल का उपयोग राष्ट्रहित में करने की अपील की।