उत्तर प्रदेश की राजनीति में हाल के दिनों में UGC को लेकर काफी चर्चा थी। ब्राह्मण समाज की नाराजगी और अंदरूनी मतभेद की अटकलें भी लगाई जा रही थीं। ऐसे माहौल में संघ प्रमुख मोहन भागवत का लखनऊ दौरा और शीर्ष नेताओं से मुलाकात ने सियासी तापमान बढ़ा दिया। इन बैठकों के बाद यह सवाल उठने लगा कि क्या अब यूपी में नया संदेश देने की कोशिश हुई है।
योगी से मुलाकात का मतलब
निराला नगर स्थित शिशु मंदिर में मोहन भागवत और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की करीब आधे घंटे बातचीत हुई। आधिकारिक तौर पर इसे सामान्य भेंट बताया गया, लेकिन 2027 विधानसभा चुनाव को देखते हुए इसे अहम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि सरकार और संगठन के तालमेल, सामाजिक समीकरण और UGC जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई। इससे यह संकेत गया कि नेतृत्व को लेकर कोई भ्रम नहीं है।
केशव से अलग बैठक, खत्म हुई अटकलें?
योगी से मुलाकात के बाद डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य भी संघ प्रमुख से मिले। लंबे समय से दोनों नेताओं के बीच मतभेद की चर्चा होती रही थी। लेकिन अलग-अलग बैठकों को कई लोग संतुलन साधने की कोशिश के रूप में देख रहे हैं। इससे यह संदेश गया कि अंदरूनी खींचतान की बातों को विराम देने की कोशिश की गई है।
ब्राह्मण समाज और UGC पर संकेत
डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक की भी मुलाकात चर्चा में रही। उन्होंने बटुकों का सम्मान किया, जिसे सामाजिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है। UGC के नए नियमों को लेकर कुछ वर्गों में असंतोष की बात सामने आई थी। ऐसे में भागवत का संयमित बयान, अदालत के फैसले का इंतजार करने की बात और संवैधानिक रास्ते की चर्चा को संतुलित रुख माना जा रहा है।
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2027 की तैयारी का इशारा
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह दौरा आने वाले चुनाव की तैयारी से जुड़ा है। यह संकेत देने की कोशिश दिखी कि यूपी में नेतृत्व को लेकर कोई बदलाव नहीं है। संगठन और सरकार एक साथ खड़े हैं। इससे पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह भी बढ़ा है और विपक्ष के आरोपों को जवाब देने की कोशिश की गई है।
आगे क्या असर होगा?
फिलहाल इन मुलाकातों के बाद माहौल कुछ शांत नजर आ रहा है। UGC पर स्पष्ट टकराव की स्थिति नहीं बनी और अंदरूनी मतभेद की चर्चाएं भी धीमी हुई हैं। अब नजर इस बात पर रहेगी कि यह एकजुटता जमीन पर कितनी असरदार साबित होती है और 2027 के चुनाव में इसका क्या परिणाम निकलता है।