जबलपुर में आयोजित अखिल भारतीय बैठक में आरएसएस सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबोले ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के संघ पर प्रतिबंध लगाने वाले बयान को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि समाज ने स्वयंसेवक संघ को पूरी तरह स्वीकार किया है। बैठक में उन्होंने धर्मांतरण, हिंदू एकता, आत्मनिर्भर भारत और युवाओं में नशा मुक्त अभियान जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की। साथ ही मणिपुर और बंगाल की स्थिति पर चिंता जताई।
खरगे के बयान पर संघ की दो टूक
दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि “संघ पर प्रतिबंध लगाने की बातें पहले भी तीन बार की जा चुकी हैं, लेकिन किसी भी बैन के लिए ठोस वजह जरूरी होती है।” उन्होंने बताया कि वर्तमान में संघ की 8,399 शाखाएं सक्रिय हैं और जनजातीय क्षेत्रों में तेजी से विस्तार हो रहा है। उन्होंने कहा कि समाज ने संघ की विचारधारा को अपनाया है, इसलिए प्रतिबंध का कोई औचित्य नहीं है।
“संघ की विचारधारा जन-जन तक पहुंचे”
होसबोले ने बताया कि आने वाले समय में 86,000 हिंदू सम्मेलन आयोजित किए जाएंगे, जिनके माध्यम से संघ का ‘पंच परिवर्तन’ और एकता का संदेश समाज तक पहुंचेगा। उन्होंने भगवान बिरसा मुंडा, सरदार पटेल और गुरु तेग बहादुर के योगदान को याद करते हुए कहा कि ये सभी एकता और स्वाभिमान के प्रतीक रहे हैं।
धर्मांतरण और नशा पर चिंता
बैठक में धर्मांतरण को गंभीर साजिश बताते हुए उन्होंने कहा कि इसे रोकने के लिए जागरूकता जरूरी है। होसबोले ने युवाओं में बढ़ती नशे की प्रवृत्ति पर भी चिंता जताई और कहा कि राष्ट्र निर्माण में युवा शक्ति की सकारात्मक भूमिका अहम है।
मणिपुर, बंगाल और नक्सलवाद पर बोले होसबोले
सरकार्यवाह ने कहा कि मणिपुर में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है। बंगाल की सीमावर्ती स्थिति और राजनीतिक तनाव पर उन्होंने केंद्र को ध्यान देने की सलाह दी। उन्होंने यह भी बताया कि झारखंड और छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद घटा है और सामाजिक एकता बढ़ी है।