ग्वालियर में शिक्षा के क्षेत्र में एक बड़ा कदम उठने जा रहा है, जहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पहले विश्वविद्यालय की नींव रखी जाएगी। 4 मई को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इस महत्वाकांक्षी परियोजना का भूमिपूजन करेंगे। “शिक्षा शून्य से शिखर तक” के संकल्प के साथ बनने वाला यह विश्वविद्यालय आधुनिक शिक्षा और पारंपरिक मूल्यों का संगम पेश करने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
55 बीघा जमीन पर बनेगा विशाल कैंपस
यह विश्वविद्यालय ग्वालियर के शिवपुरी लिंक रोड स्थित बेला गांव में करीब 55 बीघा जमीन पर तैयार किया जाएगा। करीब 110 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह संस्थान आने वाले समय में प्रदेश के प्रमुख शैक्षणिक केंद्रों में शामिल हो सकता है।
4 मई को होगा भूमिपूजन समारोह
विश्वविद्यालय के निर्माण की औपचारिक शुरुआत 4 मई को भूमिपूजन के साथ होगी। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य भूमिका में रहेंगे। कार्यक्रम में उच्च शिक्षा मंत्री इंदर सिंह परमार और प्रभारी मंत्री तुलसी सिलावट भी शामिल होंगे।
ऋषि गालव विश्वविद्यालय होगा नाम
इस नए संस्थान का नाम ऋषि गालव विश्वविद्यालय रखा गया है। कार्यक्रम की अध्यक्षता संघ के प्रांत संघ चालक अशोक पांडे करेंगे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में सुरेश सोनी मौजूद रहेंगे। विश्वविद्यालय का संचालन मध्य भारत शिक्षा समिति द्वारा किया जाएगा।
विभिन्न कोर्स और 5000 सीटों की क्षमता
विश्वविद्यालय में लगभग 5000 छात्रों के प्रवेश की क्षमता होगी। यहां नर्सिंग, पैरामेडिकल, मैनेजमेंट और इंजीनियरिंग जैसे कोर्स शुरू करने की योजना है, जो आवश्यक अनुमति मिलने के बाद चरणबद्ध तरीके से संचालित किए जाएंगे।
2027 से शुरू हो सकता है शैक्षणिक सत्र
प्रशासन की योजना के अनुसार, विश्वविद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया 2027-28 सत्र से शुरू हो सकती है। लक्ष्य है कि 18 जुलाई 2027, गुरु पूर्णिमा के दिन से शैक्षणिक गतिविधियां शुरू हो जाएं। परिसर में छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग हॉस्टल की सुविधा भी उपलब्ध होगी।