भोपाल। मध्यप्रदेश के निजी स्कूलों में आरटीई (Right to Education) के तहत दाखिल करीब 10 हजार बच्चों की पढ़ाई पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्राइवेट स्कूल संचालकों ने राज्य शिक्षा केंद्र को अल्टीमेटम देते हुए चेतावनी दी है कि यदि 30 सितंबर तक बकाया फीस का भुगतान नहीं किया गया, तो 1 अक्टूबर से आरटीई के बच्चों को पढ़ाने में असमर्थ होंगे। स्कूलों का कहना है कि पिछले तीन साल से फीस की प्रतिपूर्ति नहीं होने से आर्थिक स्थिति बिगड़ गई है।
फीस भुगतान में तीन साल की देरी
निजी स्कूल एसोसिएशन के प्रतिनिधियों ने बताया कि सरकार ने आरटीई योजना के तहत हर साल हजारों बच्चों का प्रवेश निजी स्कूलों में कराया है। इन बच्चों की फीस का भुगतान सरकार द्वारा किया जाना था, लेकिन पिछले तीन साल से प्रतिपूर्ति नहीं हुई है। इस कारण स्कूलों को भारी आर्थिक दबाव झेलना पड़ रहा है।
शिक्षकों के वेतन पर संकट
स्कूल संचालकों का कहना है कि शिक्षकों का वेतन और स्कूल का संचालन फीस पर निर्भर है। लंबे समय से भुगतान न होने से त्योहारी सीजन में वेतन देना मुश्किल हो रहा है। कई बार ज्ञापन देने के बावजूद विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
1200 स्कूल, 10 हजार बच्चे प्रभावित
भोपाल शहर में ही करीब 1200 निजी स्कूलों में 10 हजार से अधिक बच्चे आरटीई के तहत पढ़ रहे हैं। यदि सरकार समय पर भुगतान नहीं करती है, तो इन बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर पड़ेगा। एसोसिएशन का कहना है कि अब और इंतजार करना संभव नहीं है।
अभिभावकों की चिंता बढ़ी
स्कूलों के फैसले से अभिभावकों में भी चिंता बढ़ गई है। कई अभिभावकों का कहना है कि अचानक पढ़ाई रुकने से बच्चों का भविष्य प्रभावित होगा। अब सबकी नजरें सरकार पर हैं कि वह समय पर भुगतान कर राहत देती है या नहीं।