Security in Bengal Elections: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। चुनाव आयोग ने सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) से जुड़े लोगों की सुरक्षा में 2,000 से ज्यादा पुलिसकर्मियों की तैनाती पर गंभीर नाराजगी जताई है। आयोग ने इसे निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के लिए चिंता का विषय बताते हुए तत्काल समीक्षा के आदेश दिए हैं।
आयोग ने मांगी रिपोर्ट
जानकारी के मुताबिक, चुनाव घोषणा से पहले राज्य सरकार ने करीब 1,000 लोगों—जिनमें 832 सीधे तौर पर TMC से जुड़े बताए गए—की सुरक्षा के लिए 2,185 पुलिसकर्मियों को तैनात किया था। इस पर चुनाव आयोग ने सख्त रुख अपनाते हुए राज्य के DGP को निर्देश दिया है कि वे 2-3 दिनों के भीतर निष्पक्ष और पेशेवर समीक्षा रिपोर्ट पेश करें।
कई अधिकारी हटाए गए
चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद आयोग ने कई बड़े प्रशासनिक फैसले भी लिए। इसमें मुख्य सचिव, DGP, गृह सचिव, कोलकाता पुलिस कमिश्नर और कानून-व्यवस्था से जुड़े वरिष्ठ अधिकारियों का तबादला शामिल है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने कहा कि ये कदम निष्पक्ष और शांतिपूर्ण चुनाव सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए हैं।
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निष्पक्ष मतदान पर जोर
चुनाव आयोग ने साफ निर्देश दिए हैं कि चुनाव प्रक्रिया पूरी तरह भयमुक्त, हिंसा मुक्त और पारदर्शी होनी चाहिए। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि वोटरों पर किसी तरह का दबाव, लालच या धमकी न हो और बूथ कब्जाने जैसी घटनाएं बिल्कुल न हों।
भारी सुरक्षा तैनाती
चुनाव को शांतिपूर्ण बनाने के लिए पश्चिम बंगाल में लगभग 2.4 लाख केंद्रीय बलों की तैनाती की जा रही है, जो अब तक की सबसे बड़ी सुरक्षा व्यवस्था मानी जा रही है। मतदान के बाद भी EVM और काउंटिंग सेंटर की सुरक्षा के लिए सैकड़ों कंपनियां तैनात रहेंगी। हाल ही में मालदा में हुई घटना के बाद सुरक्षा को लेकर सतर्कता और बढ़ा दी गई है, जिससे चुनाव निष्पक्ष तरीके से संपन्न कराए जा सकें।