बुधवार का दिन भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए ऐतिहासिक रहा, लेकिन खुश करने वाला नहीं. पहली बार रुपया 90 के पार चला गया, जो एक बड़ा मनोवैज्ञानिक स्तर माना जाता है. इस गिरावट ने उद्योग जगत से लेकर आम उपभोक्ताओं तक चिंता बढ़ा दी है. आयातित सामान महंगा होगा, एयरलाइन, इलेक्ट्रॉनिक्स और तेल कंपनियों पर असर पड़ेगा और शेयर बाजार में अस्थिरता बढ़ सकती है. आश्चर्य की बात यह है कि रुपये में गिरावट तब आई है जब भारत की GDP पिछले छह तिमाहियों में सबसे ज्यादा 8.2% पर है और महंगाई 0.25% के रिकॉर्ड लो स्तर पर. फिर भी विदेशी निवेशकों की बिकवाली, बढ़ता व्यापार घाटा और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं ने रुपये को दबाव में ला दिया.
किन सेक्टर्स पर पड़ेगा सबसे ज्यादा असर?
सबसे बड़ी मार तेल उद्योग पर पड़ेगी क्योंकि भारत अपना 85% तेल बाहर से खरीदता है. रुपये के कमजोर होने से तेल कंपनियों का खर्च बढ़ेगा और सरकार को पेट्रोलियम सब्सिडी भी बढ़ानी पड़ सकती है. इसी तरह खाद उद्योग पर भी बड़ा झटका है क्योंकि खाद आयात महंगा होगा और सरकार का सब्सिडी बिल बढ़ेगा. विदेश में पढ़ाई करने वाले छात्रों के लिए न्यूज़ और भी बुरी है डॉलर महंगा होने से फीस, लिविंग कॉस्ट और लोन EMI सब बढ़ेंगे. एयरलाइन कंपनियां भी मुश्किल में हैं क्योंकि फ्यूल, लीजिंग चार्ज और सर्विस कॉस्ट सभी विदेशी मुद्रा में तय होते हैं. कार, इलेक्ट्रिक व्हीकल, मोबाइल, टीवी, एसी जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स भी महंगे होंगे क्योंकि इनके पुर्जे काफी हद तक आयातित हैं. इसके अलावा सोना-चांदी की कीमतें भी और उछल सकती हैं, जिससे ज्वेलरी बाजार में आग लग सकती है.
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किनको होगी जबरदस्त कमाई?
रुपये की कमजोरी कुछ सेक्टरों के लिए बोनस साबित हो रही है. विदेश में रहने वाले भारतीय अब हर डॉलर भेजने पर ज्यादा रुपये पाएंगे, जिससे देश में रेमिटेंस में और उछाल आ सकता है. वित्त वर्ष 2025 में भारत पहले ही 135 अरब डॉलर का रिकॉर्ड रेमिटेंस प्राप्त कर चुका है. दूसरा बड़ा फायदा निर्यातकों को मिलेगा. रुपये के सस्ता होने से भारतीय सामान ग्लोबल मार्केट में और प्रतिस्पर्धी हो जाएगा, जिससे अमेरिका और यूरोप जैसे बाजारों में मांग बढ़ सकती है. IT और फार्मा उद्योग तो इस माहौल में सबसे ज्यादा लाभ में हैं क्योंकि उनकी आय डॉलर में होती है और रुपये की कमजोरी सीधे उनकी कमाई को बढ़ा देती है.
आगे क्या होगा? क्या बढ़ेगी महंगाई?
कमजोर रुपये से आयात महंगा होगा, इसलिए आने वाले महीनों में महंगाई पर थोड़ा दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, फिलहाल महंगाई काफी नीचे है, इसलिए तत्काल बड़ा खतरा नहीं दिख रहा. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक विदेशी निवेशक लौटते नहीं और व्यापार घाटा सुधरता नहीं, रुपये में उतार-चढ़ाव जारी रहेगा. आरबीआई बाजार में स्थिरता लाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितताओं के बीच असर सीमित हो सकता है.