भारतीय रुपया पिछले कुछ दिनों से अपने इतिहास के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। बुधवार को रुपये ने पहली बार 90 का स्तर तोड़ दिया, जिससे बाजार में हलचल बढ़ गई। डॉलर की बढ़ती वैश्विक मांग, विदेशी निवेशकों की बिकवाली और अंतरराष्ट्रीय अनिश्चितताओं की वजह से रुपये पर दबाव बढ़ा है। लेकिन अब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने इस स्थिति पर स्पष्ट प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि रुपये को अपना रास्ता खुद तलाशना होगा। उन्होंने HT लीडरशिप समिट में कहा कि करेंसी पर बहस पुरानी स्थितियों से तुलना करके नहीं, बल्कि मौजूदा आर्थिक परिस्थिति को ध्यान में रखकर करनी चाहिए।
रुपये की कमजोरी पर एक्सपोर्ट का तर्क, लेकिन…
वित्त मंत्री ने बताया कि विदेशी मुद्रा बाज़ार में उतार-चढ़ाव कोई नया विषय नहीं है। उन्होंने कहा कि करेंसी कमजोर होने पर अक्सर कहा जाता है कि इससे एक्सपोर्टर्स को फायदा होता है। हालांकि उन्होंने इस तर्क को पूरी तरह पर्याप्त नहीं माना। उनका कहना है कि रुपये की गिरावट का विश्लेषण करते समय देश की आर्थिक ताकतों को भी देखना जरूरी है। भारत की अर्थव्यवस्था तेज़ी से बढ़ रही है और कई सेक्टर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। इसलिए सिर्फ रुपये की गिरावट के आधार पर अर्थव्यवस्था की स्थिति का आकलन करना सही नहीं होगा।
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90.46 का रिकॉर्ड लो, लेकिन आर्थिक संकेतक क्यों मजबूत?
4 दिसंबर को रुपया डॉलर के मुकाबले 90.46 तक गिर गया, जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। इसकी मुख्य वजह भारत-अमेरिका ट्रेड डील में देरी और शेयर बाजार में विदेशी पूंजी का लगातार बाहर जाना बताया जा रहा है। दिलचस्प बात यह है कि जब रिटेल महंगाई रिकॉर्ड न्यूनतम स्तर पर है और GDP ग्रोथ 8% से भी ज्यादा है, तब करेंसी का कमजोर होना कई लोगों के लिए हैरान कर देने वाला है। वित्त मंत्री ने कहा कि आर्थिक वास्तविकताओं को ध्यान में रखते हुए करेंसी मूवमेंट को समझने की जरूरत है, न कि केवल तुलना के आधार पर निष्कर्ष निकालने की।
आने वाले महीनों में क्या होगी भारतीय ग्रोथ?
भारत की GDP ग्रोथ दूसरी तिमाही में 8.2% रही, जो छह तिमाहियों में सबसे अधिक है। वहीं रिटेल महंगाई अक्टूबर में 0.25% पर पहुंच गई, जो अभूतपूर्व स्तर है। इन मजबूत आंकड़ों के आधार पर वित्त मंत्री ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था आने वाले महीनों में स्थिर और मजबूत गति से आगे बढ़ेगी। उनका अनुमान है कि देश की विकास दर पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में 7% या उससे अधिक रह सकती है।