Rupee Falls Against Dollar : भारतीय रुपया मंगलवार, 18 अगस्त को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले कमजोर होकर करीब 95.68 रुपये प्रति डॉलर के स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपये में करीब 7 पैसे की गिरावट दर्ज की गई। इस कमजोरी की बड़ी वजह अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों का 90 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर पहुंचना माना जा रहा है।
तीन हफ्ते के निचले स्तर के करीब पहुंचा रुपया
रॉयटर्स के मुताबिक, मंगलवार को रुपया 95.6750 प्रति डॉलर तक कमजोर हुआ, जो 30 जुलाई के बाद का सबसे निचला स्तर है। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक की ओर से बाजार में हस्तक्षेप किए जाने से रुपये की गिरावट सीमित रही। केंद्रीय बैंक ने हाजिर बाजार के साथ-साथ अन्य विदेशी मुद्रा बाजारों में भी कदम उठाए।
कच्चे तेल की बढ़ती कीमत सबसे बड़ी चिंता
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने पर देश को तेल खरीदने के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपये पर दबाव बनता है। मंगलवार को ब्रेंट कच्चा तेल 91 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच गया। मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव और अमेरिका-ईरान के बीच संघर्षविराम को लेकर अनिश्चितता ने तेल की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ाई है।
महंगे तेल का आम लोगों पर क्या असर होगा
अगर कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर कई स्तरों पर पड़ सकता है। आयात बिल बढ़ने से व्यापार घाटे पर दबाव आ सकता है। साथ ही ईंधन और परिवहन की लागत बढ़ने पर महंगाई का जोखिम भी बढ़ सकता है। रुपये में कमजोरी का असर विदेश से आने वाली कई वस्तुओं पर भी पड़ सकता है। आयातित इलेक्ट्रॉनिक्स, कच्चे माल और कुछ अन्य उत्पादों की लागत बढ़ने की संभावना रहती है।
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आरबीआई संभाल रहा रुपये की स्थिति
रुपये पर दबाव के बीच भारतीय रिजर्व बैंक लगातार बाजार पर नजर बनाए हुए है। रॉयटर्स के अनुसार, आरबीआई की ओर से डॉलर की बिक्री और अन्य बाजार हस्तक्षेपों ने रुपये को और ज्यादा गिरने से रोकने में मदद की है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार भी 700 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है, जिससे केंद्रीय बैंक के पास बाजार में हस्तक्षेप करने के लिए पर्याप्त सुरक्षा कवच है। फिलहाल बाजार की नजर कच्चे तेल की कीमतों और मध्य पूर्व की स्थिति पर बनी हुई है। अगर तेल की कीमतों में और तेजी आती है, तो रुपये पर दबाव बढ़ सकता है। वहीं, तनाव कम होने और तेल की कीमतों में नरमी आने पर रुपये को राहत मिलने की उम्मीद की जा सकती है।