हफ्ते के चौथे कारोबारी दिन शेयर बाजार भले ही गिरावट के साथ खुला, लेकिन रुपये ने मजबूती दिखाई। गुरुवार सुबह भारतीय मुद्रा 38 पैसे चढ़कर 90.40 प्रति डॉलर पर पहुंच गई। विदेशी निवेश के हल्के प्रवाह और रिजर्व बैंक की सक्रियता ने रुपये को सहारा दिया। इससे बाजार में यह संकेत गया कि फिलहाल रुपये पर दबाव कम हो सकता है।
डॉलर की कमजोरी से मिला सहारा
अमेरिका के हालिया आर्थिक आंकड़े उम्मीद से कमजोर रहे। गैर-कृषि रोजगार और खुदरा बिक्री के आंकड़ों में नरमी से डॉलर पर दबाव आया। जब डॉलर कमजोर होता है तो अन्य मुद्राओं को फायदा मिलता है। इसी का असर रुपये पर भी दिखा। विशेषज्ञों का कहना है कि मनोवैज्ञानिक स्तर पर भी इससे बाजार को राहत मिली।
पहले क्यों दबाव में था रुपया?
बीते दिनों आयातकों की ओर से डॉलर की मांग बढ़ी थी। साथ ही कच्चे तेल की कीमतों में उछाल और भू-राजनीतिक तनाव ने रुपये पर दबाव बनाया। तेल महंगा होने से भारत को ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे मुद्रा कमजोर होती है। हालांकि इस बार विदेशी निवेश और केंद्रीय बैंक की रणनीति ने गिरावट को संभाल लिया।
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इंटरबैंक बाजार में क्या रहा हाल?
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 90.55 पर खुला और बाद में 90.40 तक मजबूत हुआ। शुरुआती घंटों में यह 90.56 तक भी गया। एक दिन पहले रुपया 22 पैसे गिरकर 90.78 पर बंद हुआ था। वहीं डॉलर इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की गई, जो प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दिखाता है।
शेयर बाजार में दिखा दबाव
मुद्रा बाजार में मजबूती के बावजूद शेयर बाजार में कमजोरी रही। सेंसेक्स 349 अंक से ज्यादा गिरकर 83,883 के आसपास पहुंच गया। निफ्टी भी 100 अंकों से अधिक फिसला। दूसरी ओर ब्रेंट क्रूड की कीमत 69 डॉलर प्रति बैरल के करीब रही, जिससे आयात लागत को लेकर चिंता बनी हुई है।
आगे क्या हो सकता है असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर विदेशी निवेश जारी रहा और डॉलर में नरमी बनी रही तो रुपया और स्थिर रह सकता है। हालांकि तेल कीमतों और वैश्विक हालात पर नजर जरूरी है। फिलहाल RBI की भूमिका और ट्रेड डील से जुड़े सकारात्मक संकेतों ने रुपये को थोड़ी राहत जरूर दी है।