केंद्रीय बजट 2026 पेश होने के एक दिन बाद भारतीय रुपये में जबरदस्त मजबूती देखने को मिली। सोमवार को शुरुआती कारोबार में रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 37 पैसे चढ़कर 91.56 के स्तर पर पहुंच गया। इससे पहले बाजार में लगातार दबाव बना हुआ था और रुपया रिकॉर्ड निचले स्तरों के आसपास घूम रहा था। शेयर बाजार में रिकवरी और वैश्विक संकेतों ने मिलकर रुपये को थोड़ी राहत दी है।
कच्चे तेल की गिरावट बनी सबसे बड़ा सहारा
रुपये को मजबूती दिलाने में सबसे अहम भूमिका कच्चे तेल की कीमतों में आई बड़ी गिरावट की रही। अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड करीब 4 प्रतिशत से ज्यादा टूटकर 66.45 डॉलर प्रति बैरल पर आ गया। भारत जैसे देशों के लिए यह राहत की खबर है, क्योंकि कच्चा तेल सस्ता होने से आयात बिल घटता है। इससे रुपये पर दबाव कम होता है और मुद्रा को मजबूती मिलती है।
कैसे बदली रुपये की चाल
अंतरबैंक विदेशी मुद्रा बाजार में रुपया 91.95 प्रति डॉलर पर खुला था। कारोबार के दौरान धीरे-धीरे इसमें मजबूती आई और यह 91.56 तक पहुंच गया। यह पिछले बंद भाव के मुकाबले 37 पैसे की बढ़त है। इससे पहले शुक्रवार को रुपया 92.02 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक फिसल गया था, हालांकि दिन के अंत में 91.93 पर बंद हुआ था। यानी गिरावट के बाद अब थोड़ी रिकवरी जरूर आई है।
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डॉलर मजबूत, फिर भी रुपया संभला
वैश्विक बाजार में डॉलर पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति दिखाने वाला डॉलर इंडेक्स 0.10 प्रतिशत की बढ़त के साथ 97.08 पर रहा। इसके बावजूद रुपये में मजबूती यह दिखाती है कि घरेलू कारण, खासकर तेल की कीमतें और बाजार की धारणा, फिलहाल ज्यादा असर डाल रही हैं। हालांकि डॉलर अगर आगे मजबूत होता है, तो रुपये पर फिर दबाव आ सकता है।
सरकार की उधारी ने बढ़ाई चिंता
बजट में सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए करीब 17.2 लाख करोड़ रुपये उधार लेने का अनुमान रखा है। यह रकम जीडीपी के 4.3 प्रतिशत के राजकोषीय घाटे को पूरा करने के लिए जुटाई जाएगी। विदेशी मुद्रा कारोबारियों का मानना है कि बजट से रुपये को कोई तात्कालिक बड़ा फायदा नहीं मिला है। ऊंची उधारी की योजना आने वाले समय में बाजार और रुपये दोनों के लिए जोखिम बन सकती है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली से खतरा
जहां एक ओर रुपये में मजबूती दिखी, वहीं विदेशी निवेशकों की गतिविधियों ने चिंता भी बढ़ा दी है। आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों ने करीब 588 करोड़ रुपये के शेयर बेच दिए। इसका मतलब है कि विदेशी निवेशक अभी भी पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं। अगर यह बिकवाली आगे बढ़ती है, तो रुपये पर फिर दबाव आ सकता है। यानी फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन आगे की राह आसान नहीं है और जरा सी चूक से नुकसान फिर लौट सकता है।