हफ्ते के आखिरी कारोबारी दिन भारतीय मुद्रा में वह मजबूती नहीं दिखी, जो एक दिन पहले नजर आई थी। शुक्रवार सुबह शुरुआती कारोबार में रुपया 8 पैसे गिरकर 90.69 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले यह 90.61 पर बंद हुआ था। डॉलर की मजबूती और घरेलू शेयर बाजार में गिरावट के कारण रुपये पर दबाव बना रहा। विदेशी मुद्रा बाजार में खुलते ही कमजोरी साफ दिखने लगी।
डॉलर क्यों हुआ हावी?
विदेशी मुद्रा विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी डॉलर इस समय मजबूत स्थिति में है। जब डॉलर मजबूत होता है तो उभरते बाजारों की मुद्राओं पर दबाव बढ़ता है। भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को लेकर शुरुआत में सकारात्मक माहौल था, लेकिन बाद में जारी दस्तावेज से नई चिंताएं सामने आईं। उसमें कुछ अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क कम करने की बात कही गई है, जिससे निवेशकों ने सतर्क रुख अपना लिया।
व्यापार समझौते पर सरकार की सफाई
वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने साफ किया कि भारत ने बातचीत के दौरान अपने संवेदनशील क्षेत्रों की पूरी सुरक्षा की है। उन्होंने कहा कि समझौते के अहम हिस्सों को सुरक्षित रखा गया है और दोनों देशों की टीमें इसे कानूनी रूप देने पर काम कर रही हैं। उम्मीद है कि मार्च के अंत तक इसे अंतिम रूप दिया जा सकता है। सरकार की इस सफाई के बावजूद बाजार में पूरी तरह भरोसा लौटता नहीं दिखा।
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एक दिन पहले आई थी मजबूती
गुरुवार को रुपया 17 पैसे चढ़कर 90.61 पर बंद हुआ था। लेकिन शुक्रवार को डॉलर सूचकांक 0.02 प्रतिशत बढ़कर 96.94 पर पहुंच गया, जिससे डॉलर की पकड़ मजबूत बनी रही। जब डॉलर इंडेक्स बढ़ता है तो बाकी मुद्राओं पर दबाव बढ़ जाता है। यही असर रुपये पर भी देखने को मिला।
शेयर बाजार और तेल की चाल
घरेलू शेयर बाजार भी दबाव में दिखा। सेंसेक्स 683 अंकों से ज्यादा गिरकर 82,991 पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी 207 अंक टूटकर 25,600 के आसपास आ गया। हालांकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हल्की नरमी रही और ब्रेंट क्रूड 67.41 डॉलर प्रति बैरल के करीब रहा। इससे कुछ राहत मिल सकती है।
आगे क्या रहेगा रुख?
विदेशी संस्थागत निवेशकों ने गुरुवार को 108 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे थे, जिससे थोड़ी उम्मीद जगी थी। लेकिन वैश्विक संकेत और डॉलर की मजबूती फिलहाल भारी पड़ती दिख रही है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि डॉलर की चाल कैसी रहती है और व्यापार समझौते को लेकर बाजार का भरोसा कितना मजबूत होता है। फिलहाल रुपये पर दबाव बना हुआ है।