रूस अब भारत को सिर्फ तेल खरीदने वाला देश नहीं बल्कि लंबे समय का रणनीतिक साझेदार मानने लगा है। ताजा संकेत बताते हैं कि रूस भारत में गैर ऊर्जा क्षेत्रों में बड़े निवेश की तैयारी कर रहा है। इंजीनियरिंग जहाज निर्माण आईटी रिन्यूएबल एनर्जी मेटलर्जी और रिफाइनिंग जैसे सेक्टर रूस की प्राथमिकता में हैं। कई रूसी कंपनियां भारत में जॉइंट वेंचर और लोकल प्रोडक्शन को लेकर बातचीत कर रही हैं। यह पूरा घटनाक्रम दिसंबर में नई दिल्ली में हुई भारत रूस शिखर बैठक के बाद तेजी से आगे बढ़ा है।
भू राजनीति के बीच बड़ा संदेश
यह साझेदारी ऐसे वक्त में सामने आई है जब वैश्विक राजनीति काफी तनावपूर्ण है। अमेरिका ने भारत पर भारी टैरिफ लगाए हैं जिनमें रूसी तेल आयात एक बड़ी वजह बताया गया है। इसके साथ ही भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील भी अंतिम चरण में है। ऐसे माहौल में रूस नहीं चाहता कि भारत पूरी तरह अमेरिकी खेमे में चला जाए। दशकों पुराने भारत रूस संबंधों को मजबूत बनाए रखने के लिए मॉस्को अब सिर्फ ऊर्जा नहीं बल्कि उद्योग और तकनीक में भी गहरा सहयोग चाहता है।
तेल से आगे बढ़ता सहयोग
रूस और भारत दोनों ही अब अपने व्यापार को सिर्फ कच्चे माल तक सीमित नहीं रखना चाहते। रूस के व्यापार प्रतिनिधि आंद्रेई सोबोलेव के मुताबिक भारत को उत्पादन के लोकलाइजेशन के लिए बेहतरीन ठिकाना माना जा रहा है। रूसी कंपनियां भारत में सामान बनाकर न सिर्फ घरेलू बाजार बल्कि दक्षिण एशिया और तीसरे देशों तक पहुंच बनाना चाहती हैं। दूसरी ओर भारतीय कंपनियां भी रूसी बाजार में नए मौके तलाश रही हैं। यह सहयोग दोनों देशों के लिए फायदेमंद माना जा रहा है।
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उत्तरी समुद्री मार्ग पर नजर
भारत और रूस के रिश्तों में अब उत्तरी समुद्री मार्ग भी अहम भूमिका निभाने लगा है। यह मार्ग आर्कटिक इलाके से होकर रूस के यूरोपीय और पूर्वी बंदरगाहों को जोड़ता है। दोनों देशों ने इस रूट पर स्थायी कार्गो सिस्टम और लॉजिस्टिक्स ढांचे पर साथ काम करने पर सहमति जताई है। जहाज निर्माण और परिवहन परियोजनाओं में भी साझेदारी की संभावना तलाशी जा रही है। यह रूट भविष्य में व्यापार को तेज और सस्ता बना सकता है।
व्यापार बढ़ाने का बड़ा लक्ष्य
फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस के अनुसार भारत रूस को अपने निर्यात को दोगुना कर दस अरब डॉलर तक ले जाने की योजना बना रहा है। लक्ष्य है कि वर्ष 2030 तक दोनों देशों के बीच व्यापार सौ अरब डॉलर तक पहुंचे। इसमें भारत से तीस से पैंतीस अरब डॉलर का निर्यात और रूस से साठ से पैंसठ अरब डॉलर का आयात शामिल हो सकता है। फार्मा इलेक्ट्रॉनिक्स और इंजीनियरिंग को खास सेक्टर माना जा रहा है।
आने वाले समय का संकेत
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह सहयोग सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। डिजिटल पेमेंट फिनटेक ग्रीन एनर्जी पर्यटन और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों में भी नई संभावनाएं खुलेंगी। रूस भारत को नॉन एनर्जी सेक्टर में बड़ा पार्टनर मानकर चल रहा है। वहीं भारत भी रूस के साथ रिश्तों को संतुलन की राजनीति का अहम हिस्सा मानता है। आने वाले वर्षों में यह साझेदारी वैश्विक आर्थिक समीकरणों को नई दिशा दे सकती है।