ईरान-इजरायल युद्ध के कारण मिडिल ईस्ट में बढ़े तनाव ने वैश्विक तेल बाजार की दिशा बदल दी है। खाड़ी क्षेत्र से सप्लाई बाधित होने की आशंका के बीच एशियाई देशों की नजर अब रूसी तेल पर टिक गई है। इसी बीच कई रूसी तेल टैंकरों ने अपना रास्ता बदलकर एशिया, खासकर भारत की ओर रुख कर लिया है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में रूसी क्रूड की मांग बढ़ी है और कीमतें भी तेजी से ऊपर गई हैं।
युद्ध से बदला वैश्विक तेल बाजार का समीकरण
ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को झटका दिया है। मिडिल ईस्ट से तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका के कारण कई देशों ने वैकल्पिक स्रोतों की तलाश शुरू कर दी है। ऐसे हालात में रूस के लिए यह स्थिति फायदे का सौदा साबित हो रही है। कुछ ही दिन पहले तक जो रूसी तेल सस्ता बिक रहा था, उसकी कीमत अब 70 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुकी है।
भारत की ओर मुड़े रूसी तेल टैंकर
मौजूदा हालात में कई रूसी तेल टैंकरों ने अपनी तय दिशा बदलकर भारत और एशिया के अन्य देशों की ओर रुख कर लिया है। बताया जा रहा है कि दो बड़े टैंकर, जो पहले पूर्वी एशिया की ओर जा रहे थे, उन्होंने अरब सागर में यू-टर्न लेकर भारत की ओर बढ़ना शुरू कर दिया। इन टैंकरों में लाखों बैरल ‘यूराल्स’ ग्रेड का क्रूड ऑयल भरा हुआ है, जिसे भारतीय रिफाइनरियां पहले से खरीदती रही हैं।
किस टैंकर में कितना तेल
जानकारी के मुताबिक ‘Odune’ नाम का सुएजमैक्स टैंकर करीब 7.3 लाख बैरल तेल लेकर ओडिशा के पारादीप बंदरगाह पहुंच चुका है। वहीं ‘Matari’ नाम का अफ्रामैक्स टैंकर 7 लाख बैरल से ज्यादा तेल के साथ गुजरात के वाडीनार पोर्ट की ओर बढ़ रहा है। इसके अलावा ‘Indri’ नाम का एक और सुएजमैक्स टैंकर, जो पहले सिंगापुर जा रहा था, उसने भी रास्ता बदलकर भारत की दिशा पकड़ ली है।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी चिंता
ईरान युद्ध के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका भी बढ़ गई है। यह जलमार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक माना जाता है। यदि यहां से तेल सप्लाई प्रभावित होती है तो एशियाई देशों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है। इसी कारण कई देशों ने अभी से वैकल्पिक सप्लाई चैन तैयार करना शुरू कर दिया है।
जेट फ्यूल टैंकर भी बदल रहे रास्ता
सिर्फ क्रूड ऑयल ही नहीं, बल्कि जेट फ्यूल के टैंकर भी अब अपनी दिशा बदल रहे हैं। कुछ टैंकर जो पहले यूरोप की ओर जा रहे थे, वे अब एशियाई बाजारों की तरफ बढ़ रहे हैं। बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में एशियाई देशों को जेट फ्यूल और ऊर्जा उत्पादों की सप्लाई करना ज्यादा लाभदायक हो गया है।