श्रीलंका के दांबुला में खेले जा रहे त्रिकोणीय सीरीज के पहले मुकाबले में सभी की नजरें वैभव सूर्यवंशी पर थीं। आईपीएल में शानदार प्रदर्शन के बाद फैंस उनसे एक और बड़ी पारी की उम्मीद कर रहे थे। वैभव ने शुरुआत में तीन चौके लगाकर अच्छे संकेत भी दिए, लेकिन वह अपनी पारी को लंबा नहीं खींच सके। 12 गेंदों पर 14 रन बनाकर वह मोहम्मद शिराज की गेंद पर आउट हो गए।
भारत को लगा दूसरा झटका
वैभव के आउट होने के बाद भारत ए की मुश्किलें और बढ़ गईं। प्रभसिमरन सिंह भी ज्यादा देर टिक नहीं सके और सिर्फ 2 रन बनाकर पवेलियन लौट गए। एक समय भारत ए का स्कोर 16 रन पर 2 विकेट था। श्रीलंका ए के गेंदबाज पूरी तरह हावी दिखाई दे रहे थे और भारतीय टीम दबाव में नजर आ रही थी।
ऋतुराज ने बदला मैच का रंग
ऐसे समय में ऋतुराज गायकवाड़ ने जिम्मेदारी संभाली। उन्होंने जल्दबाजी दिखाने के बजाय पारी को धीरे-धीरे आगे बढ़ाया। पहले प्रियांश आर्य के साथ अहम साझेदारी की और फिर कप्तान तिलक वर्मा के साथ मिलकर श्रीलंका के गेंदबाजों की मेहनत पर पानी फेर दिया। ऋतुराज ने एक छोर संभाले रखा और लगातार रन बनाते रहे।
शतक से चमके ऋतुराज
ऋतुराज गायकवाड़ ने 112 गेंदों में अपना शानदार शतक पूरा किया। उनकी पारी में 6 चौके और 3 छक्के शामिल रहे। उन्होंने 114 गेंदों पर 101 रन बनाए। हालांकि शतक पूरा करने के तुरंत बाद वह आउट हो गए, लेकिन तब तक भारत ए मजबूत स्थिति में पहुंच चुका था। उनकी यह पारी टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हुई।
तिलक ने भी निभाया साथ
दूसरे छोर से तिलक वर्मा ने भी शानदार संयम दिखाया। उन्होंने अर्धशतक पूरा किया और ऋतुराज के साथ चौथे विकेट के लिए 150 रन से ज्यादा की साझेदारी की। शुरुआती झटकों के बाद दोनों बल्लेबाजों ने पारी को संभालते हुए टीम को बड़े स्कोर की तरफ पहुंचाया। इसी साझेदारी ने मुकाबले का रुख भारत की ओर मोड़ दिया।
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नई पीढ़ी ने दिया संदेश
इस मुकाबले ने एक बार फिर दिखाया कि भारत के पास युवा प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जहां वैभव सूर्यवंशी इस बार बड़ी पारी नहीं खेल सके, वहीं ऋतुराज गायकवाड़ ने अनुभव का परिचय देते हुए शतक जड़ दिया। तिलक वर्मा ने भी कप्तानी के साथ जिम्मेदार बल्लेबाजी दिखाई। भारतीय क्रिकेट के लिए यह संकेत है कि आने वाले समय में टीम के पास कई मजबूत विकल्प मौजूद हैं।