INDIA-RUSSIA DEFENCE DEAL: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भारत के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के साथ उनकी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से द्विपक्षीय मुलाकात भी होगी। इस बैठक में रक्षा सहयोग अहम मुद्दा रह सकता है। S-400 की बची डिलीवरी, अतिरिक्त सिस्टम, ब्रह्मोस-एनजी, Su-30MKI के सुपर सुखोई अपग्रेड और Su-57E जैसे बड़े रक्षा प्रस्तावों पर बातचीत की संभावना है।
S-400 की डिलीवरी पर नजर
भारत ने रूस से पांच S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने का समझौता किया था। इनमें से चार सिस्टम भारत को मिल चुके हैं और तैनात भी हैं, जबकि पांचवें सिस्टम की डिलीवरी नवंबर 2026 तक होने की उम्मीद है। मोदी-पुतिन मुलाकात में इसकी समयबद्ध डिलीवरी और रखरखाव से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। रूस ने भारत में मेंटेनेंस, रिपेयर और ओवरहॉल सुविधा स्थापित करने का प्रस्ताव भी दिया है।
अतिरिक्त S-400 की तैयारी
भारत अतिरिक्त पांच S-400 मिसाइल सिस्टम खरीदने पर भी विचार कर रहा है। इसके लिए रूस की ओर से करीब 50 हजार करोड़ रुपये के प्रस्ताव की बात सामने आई है। अगर यह योजना आगे बढ़ती है तो भारत की एयर डिफेंस क्षमता और मजबूत हो सकती है। S-400 लंबी दूरी से विमान, मिसाइल और ड्रोन जैसे हवाई खतरों को निशाना बनाने में सक्षम है। ऐसे में अतिरिक्त सिस्टम को रणनीतिक रूप से अहम माना जा रहा है।
ब्रह्मोस-एनजी पर बढ़ेगी रफ्तार
भारत और रूस के संयुक्त प्रोजेक्ट ब्रह्मोस का अगला संस्करण ब्रह्मोस-एनजी भी बातचीत में अहम मुद्दा हो सकता है। यह मौजूदा ब्रह्मोस के मुकाबले हल्की मिसाइल है और इसकी वजह से लड़ाकू विमानों पर ज्यादा मिसाइलें लगाने की क्षमता बढ़ सकती है। पुतिन के दौरे में इसके विकास, संयुक्त उत्पादन और अपग्रेड को लेकर चर्चा संभव है। एयर, लैंड और सी-बेस्ड प्लेटफॉर्म के लिए इसकी उपयोगिता इसे महत्वपूर्ण बनाती है।
सुपर सुखोई पर बड़ा फैसला?
भारतीय वायुसेना के पास करीब 260 Su-30MKI लड़ाकू विमान हैं। इन्हें आधुनिक बनाने के लिए सुपर सुखोई कॉन्फिगरेशन में अपग्रेड करने की योजना पर लंबे समय से चर्चा हो रही है। इस अपग्रेड में नए रडार, आधुनिक एवियोनिक्स, बेहतर हथियार प्रणाली और लंबी दूरी की मिसाइलों को शामिल किया जा सकता है। पुतिन और मोदी की बैठक में इस बड़े प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर सहमति बनने की संभावना है।
Su-57E से स्टील्थ गैप भरने की कोशिश
रूस का पांचवीं पीढ़ी का Su-57E लड़ाकू विमान भी भारत के लिए अहम विकल्प बन सकता है। रूस ने विमान की बिक्री के साथ भारत में संयुक्त उत्पादन और तकनीक हस्तांतरण का प्रस्ताव दिया है। सीमित संख्या में विमान खरीदने के बाद स्थानीय उत्पादन की संभावना पर भी विचार हो सकता है। रडार, इंजन और हथियारों के इंटीग्रेशन जैसी तकनीकों पर बातचीत महत्वपूर्ण होगी। अगर यह प्रस्ताव आगे बढ़ता है तो भारत-रूस रक्षा सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।
भारत के लिए क्यों अहम हैं ये प्रस्ताव?
इन संभावित सौदों का फोकस भारत की सैन्य क्षमता को आधुनिक बनाने पर है। S-400 एयर डिफेंस मजबूत करेगा, ब्रह्मोस-एनजी स्ट्राइक क्षमता बढ़ा सकता है और Su-30MKI अपग्रेड मौजूदा लड़ाकू बेड़े को ज्यादा समय तक प्रभावी बनाए रखने में मदद करेगा। वहीं Su-57E भविष्य की स्टील्थ जरूरतों के लिए विकल्प दे सकता है। भारत के लिए टेक्नोलॉजी ट्रांसफर, संयुक्त उत्पादन और आत्मनिर्भरता भी इन चर्चाओं का अहम हिस्सा रहेंगे।