Vande Bharat Maintenance Hub : भारतीय रेलवे वंदे भारत ट्रेनों के रखरखाव को अधिक आधुनिक और व्यवस्थित बनाने के लिए गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती में बड़ा मेंटेनेंस हब तैयार कर रहा है। करीब 307 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस सुविधा में 24 कोच वाली वंदे भारत ट्रेनों की विशेष मरम्मत और निर्धारित सर्विसिंग की जाएगी। पश्चिम रेलवे के अहमदाबाद मंडल की साबरमती इंटीग्रेटेड कोचिंग डिपो परियोजना के दूसरे चरण में यह हब विकसित किया जा रहा है। इसमें भारी मरम्मत, पहियों के रखरखाव और आधुनिक उपकरणों की जांच के लिए अलग-अलग सुविधाएं बनाई जा रही हैं। इससे रेलवे को अपनी आधुनिक ट्रेनों के रखरखाव की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
24 कोच वाली ट्रेनों की सर्विसिंग
इस हब को 24 कोच वाली वंदे भारत ट्रेनों के शॉप शेड्यूल-I (SSI) और शॉप शेड्यूल-II (SSII) रखरखाव के लिए तैयार किया जा रहा है। रेलवे की परियोजना योजना के मुताबिक, एक ट्रेन सेट के SSI रखरखाव में करीब 30 दिन और SSII में लगभग 45 दिन लग सकते हैं। इस क्षमता के आधार पर केंद्र सालाना लगभग 12 ट्रेन सेट का SSI या आठ ट्रेन सेट का SSII रखरखाव कर सकेगा। निर्धारित समय पर होने वाली यह सर्विसिंग ट्रेनों के विभिन्न उपकरणों की जांच और जरूरी मरम्मत के लिए महत्वपूर्ण है। इससे रेलवे को बड़े ट्रेन सेटों के रखरखाव की बेहतर व्यवस्था मिल सकेगी।
भारी मरम्मत के लिए विशेष शेड
परियोजना के तहत 322 मीटर लंबा और 25 मीटर चौड़ा हेवी रिपेयर बे शेड बनाया जा रहा है। इसका क्षेत्रफल करीब 86,597 वर्ग फीट है और निर्माण कार्य अंतिम चरण में बताया गया है। यहां दो प्रमुख मेंटेनेंस लाइनें बनाई गई हैं। पहली लाइन पर सिंक्रोनाइज्ड पिट जैक लगाए जाएंगे, जिनकी मदद से कोचों को उठाकर उनकी बोगियों को अलग किया जा सकेगा। दूसरी लाइन का इस्तेमाल कोच के अंदरूनी हिस्सों, यात्री सुविधाओं, ब्रेकिंग सिस्टम और इलेक्ट्रिकल उपकरणों के रखरखाव के लिए होगा। इससे ट्रेन के अलग-अलग हिस्सों की जांच और मरम्मत व्यवस्थित तरीके से की जा सकेगी।
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महत्वपूर्ण उपकरणों की होगी मरम्मत
वंदे भारत ट्रेनों में इस्तेमाल होने वाले प्रमुख यांत्रिक और विद्युत उपकरणों की सर्विसिंग के लिए अलग सेक्शन शेड तैयार किए जा रहे हैं। इनकी लंबाई 322 मीटर और चौड़ाई 20 मीटर होगी। यहां ट्रैक्शन ट्रांसफॉर्मर, ट्रैक्शन कन्वर्टर, ट्रैक्शन मोटर, ऑक्जिलरी कन्वर्टर, आइसोलेशन ट्रांसफॉर्मर, पैंटोग्राफ और छत पर लगे एयर-कंडीशनिंग पैकेज यूनिट जैसे उपकरणों की मरम्मत की जा सकेगी। इन सुविधाओं का उद्देश्य महत्वपूर्ण पुर्जों की जांच, खोलने, जोड़ने और ओवरहालिंग के लिए अलग व्यवस्था उपलब्ध कराना है।
रेलवे ट्रैक और सबस्टेशन तैयार
परियोजना में ट्रैक इन्फ्रास्ट्रक्चर का काम भी आगे बढ़ा है। चार स्टेबलिंग लाइनों पर करीब 2,547 मीटर रेल लिंक बिछाने का काम पूरा कर लिया गया है। इसके अलावा, लगभग 6,458 वर्ग फीट क्षेत्र में बना इलेक्ट्रिकल सबस्टेशन भवन भी तैयार होकर रेलवे को सौंपा जा चुका है। इन सुविधाओं के साथ साबरमती में वंदे भारत ट्रेनों की विशेष सर्विसिंग के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा विकसित किया जा रहा है। हब के पूरी तरह तैयार होने पर रेलवे की निर्धारित रखरखाव क्षमता बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है।